आखिर नागरिकता का सबूत क्या है? कागजों के मकड़जाल में फंसा आम आदमी, पढ़िए इनसाइड स्टोरी: क्यों आधार, वोटर आईडी और पासपोर्ट पर भी उठ रहे सवाल

आखिर नागरिकता का सबूत क्या है? कागजों के मकड़जाल में फंसा आम आदमी, पढ़िए इनसाइड स्टोरी: क्यों आधार, वोटर आईडी और पासपोर्ट पर भी उठ रहे सवाल

विशेष लेख
यतीश व्यास 

आधार कार्ड दिखाइए, वोटर आईडी है?, पैन कार्ड जमा कर दीजिए, पासपोर्ट की कॉपी लगाइए- वर्षों से सरकारी और निजी कामकाज में यही दस्तावेज पहचान और सत्यापन का आधार माने जाते रहे हैं। लेकिन जब नागरिकता की बात आती है तो स्थिति अचानक बदल जाती है। तब सवाल उठता है कि यदि आधार, वोटर कार्ड, पैन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस और यहां तक कि पासपोर्ट भी नागरिकता का अंतिम प्रमाण नहीं हैं, तो आखिर नागरिकता का आधार है क्या?

यही सवाल आज देश के करोड़ों लोगों के मन में है। आम नागरिक के लिए यह समझना कठिन हो जाता है कि जिन दस्तावेजों को सरकारें स्वयं जारी करती हैं, वे पहचान तो साबित करते हैं, लेकिन नागरिकता नहीं।

पहचान और नागरिकता में बड़ा फर्क-

कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार आधार कार्ड व्यक्ति की पहचान और निवास का प्रमाण है, नागरिकता का नहीं। पैन कार्ड करदाता की पहचान बताता है। ड्राइविंग लाइसेंस वाहन चलाने की अनुमति देता है। वोटर कार्ड यह दर्शाता है कि व्यक्ति मतदाता सूची में दर्ज है। पासपोर्ट भी यात्रा और पहचान का महत्वपूर्ण दस्तावेज है, लेकिन कई न्यायिक और सरकारी व्याख्याओं में इसे भी नागरिकता का अंतिम और निर्विवाद प्रमाण नहीं माना गया है। यहीं से भ्रम पैदा होता है। आम आदमी पूछता है कि यदि ये सारे दस्तावेज नागरिकता सिद्ध नहीं करते, तो फिर नागरिकता सिद्ध कैसे होगी। 

जन्म प्रमाण पत्र और वंशावली पर क्यों आ जाती है बात-

नागरिकता संबंधी विवादों या कानूनी जांच के मामलों में अक्सर जन्म प्रमाण पत्र, माता-पिता के दस्तावेज, भूमि अभिलेख, शैक्षणिक रिकॉर्ड और अन्य ऐतिहासिक दस्तावेजों की मांग की जाती है। लेकिन भारत के ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों में करोड़ों लोगों के पास दशकों पुराने ऐसे रिकॉर्ड उपलब्ध ही नहीं हैं। यही वजह है कि नागरिकता पर होने वाली बहस में सबसे अधिक चिंता गरीब, ग्रामीण और वंचित वर्गों को होती है। जिनके पास आधुनिक दस्तावेज तो हैं, लेकिन पुरानी पीढ़ियों के रिकॉर्ड नहीं।

सरकारें जवाब दें-

यदि आधार, वोटर कार्ड, पैन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस और पासपोर्ट नागरिकता के अंतिम प्रमाण नहीं हैं, तो सरकारों और नीति निर्माताओं की जिम्मेदारी है कि वे स्पष्ट और सरल भाषा में देशवासियों को बताएं कि आखिर नागरिकता साबित करने के लिए कौन-कौन से दस्तावेज पर्याप्त माने जाएंगे। क्योंकि नागरिकता केवल एक कानूनी शब्द नहीं, बल्कि व्यक्ति के अधिकारों, सम्मान और अस्तित्व से जुड़ा प्रश्न है। एक लोकतांत्रिक देश में नागरिक को यह भ्रम नहीं होना चाहिए कि उसके पास मौजूद सभी सरकारी दस्तावेज होने के बावजूद उसकी नागरिकता पर प्रश्नचिह्न लग सकता है।

आम आदमी की उलझन-

आज स्थिति यह है कि आम नागरिक के हाथ में दस्तावेज़ों का पुलिंदा है, लेकिन उसके मन में सवाल कायम है- जब आधार नहीं, वोटर कार्ड नहीं, पैन नहीं, ड्राइविंग लाइसेंस नहीं और पासपोर्ट भी नहीं तो आखिर मेरी भारतीय नागरिकता का सबसे बड़ा प्रमाण क्या है?