कोटा- डिलीवरी थिएटर बना मौत का दरवाजा! करोड़ों के अस्पताल में प्रसूताओं की मौत से कोहराम, नौसिखिए हाथों में जिंदगी सौंपने के आरोप, नेताओं के दौरे में हंसते रहे मेडिकल कॉलेज प्रिंसिपल

कोटा- डिलीवरी थिएटर बना मौत का दरवाजा! करोड़ों के अस्पताल में प्रसूताओं की मौत से कोहराम, नौसिखिए हाथों में जिंदगी सौंपने के आरोप, नेताओं के दौरे में हंसते रहे मेडिकल कॉलेज प्रिंसिपल

यतीश व्यास 

कोटा 7 मई। मेडिकल कॉलेज के नए अस्पताल में प्रसूताओं की लगातार बिगड़ती हालत और दो महिलाओं की मौत ने चिकित्सा व्यवस्था को कठघरे में खड़ा कर दिया है। किडनी फेलियर से जुड़ी जटिलताओं के बीच हुई इन मौतों के बाद अस्पताल प्रबंधन, डॉक्टरों की कार्यशैली और पूरे सिस्टम पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। आरोप हैं कि अनाड़ी एवं नौसिखिए चिकित्सकों द्वारा ऑपरेशन किए गए, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों ने समय रहते इस गंभीर मामले पर ध्यान नहीं दिया।

सूत्रों के अनुसार ऑपरेशन के दौरान पेशाब की नली बंद कर दी गई, जिससे मरीज का यूरिन रुक गया। इसके बाद क्रिएटिनिन तेजी से बढ़ा, जो किडनी के लिए घातक साबित हुआ। बताया जा रहा है कि स्थिति लगातार बिगड़ने के बावजूद समय पर गंभीरता नहीं दिखाई गई। वहीं यह कहा जा रहा है कि सरकारी सप्लाई दवाओं और फ्लूड से प्रसूताओं को नुकसान हुआ है और इन बैच की सप्लाई पर रोक लगाई जा रही है। लेकिन यह तो पूरे अस्पताल में सप्लाई हुए हैं सिर्फ ऑपरेशन होने वाली मरीजों को ही नुकसान क्यों हुआ, इसका जवाब किसी के पास नहीं है।

सूत्रों का कहना है कि मामले की जानकारी यूरोलॉजी विभाग को भी दी गई थी। विभाग से डॉक्टर आकर मरीज को देखकर गए, लेकिन इसके बावजूद कोई ठोस उपचार या जरूरी हस्तक्षेप नहीं किया गया। चर्चा यह भी है कि यदि समय रहते मरीज की डायलिसिस करवाई जाती अथवा दोबारा ऑपरेशन कर स्थिति की जांच की जाती, तो पूरा मामला उसी समय सामने आ सकता था और संभवतः मरीजों की जान बचाई जा सकती थी।

मौतों के बाद अस्पताल में हड़कंप मच गया और नेताओं के दौरे शुरू हो गए। कुछ नेताओं ने प्रदर्शन भी किया, लेकिन अब तक किसी जिम्मेदार डॉक्टर या अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई नहीं होना लोगों में नाराजगी पैदा कर रहा है। सवाल यह उठ रहा है कि आखिर मेडिकल कॉलेज कोटा में प्रसूताओं की मौतों के लिए जिम्मेदार कौन है?

विधायक संदीप शर्मा के अस्पताल दौरे के दौरान मेडिकल कॉलेज प्रिंसिपल डॉ. निलेश जैन का कथित रूप से हंसते हुए नजर आना भी चर्चा का विषय बना हुआ है। परिजनों और लोगों का कहना है कि जब अस्पताल में मातम पसरा हो, तब जिम्मेदारों का ऐसा रवैया संवेदनहीनता को दर्शाता है।

सूत्रों के अनुसार अस्पताल प्रबंधन पूरे मामले को दबाने में जुटा हुआ है। इधर, न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल के गायनी विभाग प्रभारी डॉ. बी.एल. पाटीदार ने इस मामले को अपनी यूनिट से जुड़ा होने से इनकार किया है। जबकि अस्पताल में दो यूनिट संचालित हैं और दूसरी यूनिट डॉ. नेहा सेहरा की है। 

लोगों का कहना है कि सरकार स्वास्थ्य सेवाओं पर अरबों रुपए खर्च कर रही है, लेकिन यदि प्रसूताओं और मासूमों की जान ही सुरक्षित नहीं है तो फिर इस व्यवस्था का मतलब क्या रह जाता है। शहर में मृतकों का पोस्टमार्टम करवाकर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए थी।

अब देखना यह होगा कि यह मामला भी केवल नेताओं के दौरों और बयानों तक सीमित रहता है या फिर मौतों के जिम्मेदार लोगों पर वास्तव में कार्रवाई होती है।