प्रसूता मौतों पर ‘क्लीन चिट’ का खेल! जिम्मेदारों पर मेहरबानी, छोटे कर्मचारियों पर गाज, नोटिस देकर बचाए गए बड़े अधिकारी, संविदाकर्मी डॉक्टर और छोटे कर्मचारी बने बलि का बकरा, जिस संविदाकर्मी डॉक्टर को बर्खास्त किया गया वह घटना के समय छुट्टी पर थी- सूत्र

प्रसूता मौतों पर ‘क्लीन चिट’ का खेल! जिम्मेदारों पर मेहरबानी, छोटे कर्मचारियों पर गाज, नोटिस देकर बचाए गए बड़े अधिकारी, संविदाकर्मी डॉक्टर और छोटे कर्मचारी बने बलि का बकरा, जिस संविदाकर्मी डॉक्टर को बर्खास्त किया गया वह घटना के समय छुट्टी पर थी- सूत्र

यतीश व्यास 

कोटा 9 मई। कोटा मेडिकल कॉलेज में दो प्रसूताओं की मौत के बाद जहां परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था, वहीं मेडिकल कॉलेज प्रिंसिपल डॉ. निलेश जैन गंभीरता दिखाने के बजाय हंसते नजर आए। इस रवैये ने न सिर्फ परिजनों बल्कि आम लोगों में भी भारी आक्रोश पैदा कर दिया।

प्रसूता मौतों के मामले में आखिरकार वही हुआ जिसकी आशंका पहले से जताई जा रही थी। जिम्मेदारों पर सख्त कार्रवाई के बजाय महज लीपापोती कर मामले को शांत करने की कोशिश की गई। गायनी विभाग के प्रभारी डॉ. बी.एल. पाटीदार, जिनकी यूनिट में दोनों प्रसूताओं की मौत हुई, उन्हें सिर्फ नोटिस देकर औपचारिकता निभा दी गई या यूं कहें कि क्लीन चिट दे दी गई, वहीं प्रशासनिक जिम्मेदारी तय होने के बावजूद प्रिंसिपल डॉ. निलेश जैन पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। कार्यवाही होती भी कैसे डॉक्टर नीलेश जैन बड़े नेताओं की पहली पसंद जो बताए जाते हैं। 

सूत्रों के मुताबिक एक अस्थायी संविदा डॉक्टर श्रद्धा उपाध्याय जिसे बर्खास्त कर दिया गया वो तो पिछले 4 दिनों से छुट्टी पर बताई जा रही है जिस दिन प्रसूताओं के ऑपरेशन किए गए उस दिन तो डॉक्टर श्रद्धा उपाध्याय अस्पताल में ही नहीं थी। इनके अलावा दो छोटे कर्मचारियों को निलंबित कर दिया गया। सरकार और मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने पूरे मामले में छोटे स्तर पर कार्रवाई दिखाकर जिम्मेदारी से बचने की कोशिश की।

जिन अधिकारियों पर ऐसे संवेदनशील मामले में जवाबदेही तय होनी चाहिए थी, वे अब भी सुरक्षित नजर आ रहे हैं। सिस्टम अब भी बड़े अधिकारियों को बचा रहा है और छोटे कर्मचारियों को बलि का बकरा बना रहा है।