कोटा- साहित्यकार डॉ. अतुल चतुर्वेदी की व्यंग्य आलोचना पुस्तक ‘व्यंग्य के विविध आयाम’ का लोकार्पण

कोटा- साहित्यकार डॉ. अतुल चतुर्वेदी की व्यंग्य आलोचना पुस्तक ‘व्यंग्य के विविध आयाम’ का लोकार्पण

यतीश व्यास 

कोटा, 19 मई। प्रतिष्ठित साहित्यिक संस्था काव्य मधुबन के तत्वावधान में मंडल पुस्तकालय के रंगनाथ सभागार में वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. अतुल चतुर्वेदी की व्यंग्य आलोचना पुस्तक ‘व्यंग्य के विविध आयाम’ का लोकार्पण समारोह आयोजित किया गया। समारोह के मुख्य अतिथि प्रसिद्ध व्यंग्यकार एवं व्यंग्य यात्रा के संपादक डॉ. प्रेम जनमेजय थे।

मुख्य अतिथि डॉ. प्रेम जनमेजय ने कहा कि व्यंग्य आलोचना का विषय रेतीली जमीन की तरह है, जिसमें नाव खेना अत्यंत कठिन कार्य है। उन्होंने कहा कि डॉ. अतुल चतुर्वेदी ने न केवल यह चुनौतीपूर्ण कार्य किया है, बल्कि हाड़ौती के व्यंग्यकारों की स्थापना और साहित्य के क्षेत्र में व्यंग्य आलोचना के लिए उपजाऊ जमीन भी तैयार की है। उन्होंने कहा कि ईमानदार व्यंग्य आलोचना पर कार्य करते हुए डॉ. अतुल चतुर्वेदी ने नया मार्ग प्रशस्त किया है। उनकी आलोचना मौलिक और तात्विक है तथा वे युवा और महिला व्यंग्यकारों सहित विभिन्न विषयों को गहराई से स्पर्श करते हुए सार्थक निष्कर्ष प्रस्तुत करते हैं।

कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार महेन्द्र नेह ने की। उन्होंने कहा कि डॉ. अतुल चतुर्वेदी का व्यक्तित्व एक निर्भीक व्यंग्यकार का है और वे पूरे देश में व्यंग्य एवं कविता का स्थापित नाम हैं। उन्होंने कहा कि हाड़ौती, जो कविता का उत्स माना जाता है, वहां डॉ. अतुल चतुर्वेदी ने व्यंग्य और गद्य की धार को और अधिक तेज किया है। उनकी व्यंग्य आलोचना की यह पुस्तक एक विशिष्ट और सार्थक साहित्यिक कर्म है, जिसने सम्पूर्ण व्यंग्य जगत को दिशा देने का कार्य किया है।

कार्यक्रम का शुभारंभ भावना काले द्वारा प्रस्तुत संगीतमय सरस्वती वंदना से हुआ। बीज वक्तव्य देते हुए व्यंग्यकार एवं कथाकार शरद उपाध्याय ने कहा कि डॉ. अतुल चतुर्वेदी अपनी पुस्तक में व्यंग्य के विविध पक्षों की विस्तार से चर्चा करते हैं। उन्होंने कहा कि लेखक व्यंग्य को नैतिक मूल्यों की रक्षा का महत्वपूर्ण माध्यम मानते हैं तथा यह पुस्तक ‘गागर में सागर’ भरने का प्रयास है।

पुस्तक पर समीक्षात्मक विचार रखते हुए प्रो. डॉ. विवेक मिश्र ने कहा कि व्यंग्यकार समाज और दुनिया को बेहतर बनाने के लिए लिखता और पढ़ता है। उन्होंने कहा कि व्यंग्य से हालात सुधरते हैं, लेकिन व्यंग्य पर व्यवस्थित अध्ययन के अभाव में इस क्षेत्र में कार्य करने वालों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। ऐसे समय में डॉ. अतुल चतुर्वेदी की पुस्तक ‘व्यंग्य के विविध आयाम’ व्यंग्य की दुनिया के सन्नाटे को तोड़ने का कार्य करती है और व्यंग्य के इतिहास, परंपरा तथा संस्कृति पर एक मुकम्मल अध्ययन प्रस्तुत करती है।

समारोह की विशिष्ट अतिथि एवं वरिष्ठ समीक्षक डॉ. उषा झा ने कहा कि व्यंग्यकार एक सामाजिक योद्धा होता है। उन्होंने कहा कि पुस्तक में हास्य और व्यंग्य के अंतर के साथ विभिन्न व्यंग्यकारों के योगदान का भी गंभीरता से उल्लेख किया गया है। यह पुस्तक व्यंग्य के स्वरूप को स्पष्ट करती है और आम पाठकों के लिए भी अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगी।

डॉ. वैदेही गौतम ने मुख्य अतिथि डॉ. प्रेम जनमेजय के साहित्यिक योगदान पर प्रकाश डालते हुए उनका परिचय प्रस्तुत किया। पुरुषोत्तम पंचोली ने डॉ. अतुल चतुर्वेदी का परिचय देते हुए उनकी साहित्यिक सक्रियता, प्रकाशनों और पुरस्कारों की जानकारी दी। कार्यक्रम का संचालन समीक्षक एवं कथाकार विजय जोशी ने अपनी विशिष्ट शैली में किया।

अपने उद्बोधन में डॉ. अतुल चतुर्वेदी ने कहा कि यह पुस्तक कई वर्षों के गंभीर अध्ययन, परिश्रम और आलोचना के क्षेत्र में सतत अध्यवसाय का परिणाम है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि यह पुस्तक व्यंग्य साहित्य के क्षेत्र में नई उम्मीद की किरण साबित होगी।

कार्यक्रम को डॉ. दीपक श्रीवास्तव ने भी संबोधित किया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि डॉ. प्रेम जनमेजय, अध्यक्ष महेन्द्र नेह, आशीष चतुर्वेदी, अंजना भालेराव और भावना काले का सम्मान किया गया। समारोह में हंसराज चौधरी, गजेन्द्र व्यास, योगेन्द्रमणि कौशिक, भगवती प्रसाद गौतम, डॉ. रामावतार मेघवाल, जितेंद्र निर्मोही, डॉ. मुकेश दाधीच, यतीश विजय, रामनारायण हलधर सहित अनेक साहित्यकार एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।