एससी/एसटी एसोसिएशन ने की कोटा मंडल में ठेका श्रमिकों के शोषण, वेतन और पीएफ-ईएसआई घोटाले की उच्चस्तरीय जांच की मांग

एससी/एसटी एसोसिएशन ने की कोटा मंडल में ठेका श्रमिकों के शोषण, वेतन और पीएफ-ईएसआई घोटाले की उच्चस्तरीय जांच की मांग

यतीश व्यास 

कोटा। ऑल इंडिया एससी/ एसटी रेलवे एम्प्लॉइज एसोसिएशन के जोनल प्रेसिडेंट मोहन सिंह ने कोटा मंडल के रेलवे स्टेशनों, अमृत भारत योजना तथा वैगन रिपेयर शॉप में कार्यरत ठेका एवं असंगठित श्रमिकों के कथित शोषण, न्यूनतम वेतन से कम अथवा शून्य वेतन भुगतान, भविष्य निधि (पीएफ) और कर्मचारी राज्य बीमा (ईएसआई) अंशदान में गड़बड़ी तथा जिम्मेदार रेल अधिकारियों की भूमिका की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की है।

इस संबंध में भारत के लोकपाल, केंद्रीय सतर्कता आयोग, केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो, मुख्य श्रम आयुक्त (केंद्रीय), रेलवे बोर्ड, कर्मचारी भविष्य निधि संगठन तथा पश्चिम मध्य रेलवे के महाप्रबंधक एवं प्रधान मुख्य सतर्कता अधिकारी को शिकायत भेजी गई है।

शिकायत में कहा गया है कि स्थानीय श्रम विभाग, कारखाना निरीक्षक और मंडल रेल प्रशासन द्वारा ठेकेदारों के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई नहीं किए जाने से स्थानीय स्तर पर निष्पक्ष जांच की उम्मीद नहीं है। इसलिए पूरे मामले की जांच स्वतंत्र केंद्रीय एजेंसियों की प्रत्यक्ष निगरानी में कराई जाए।

पत्र में आरोप लगाया गया है कि वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक एवं वाणिज्य विभाग द्वारा रेलवे कैटरिंग स्टॉल संचालकों के कर्मचारियों का आधिकारिक चिकित्सकीय परीक्षण कराकर परिचय पत्र जारी किए जाते हैं, लेकिन इसके बावजूद स्टॉल संचालकों द्वारा उन्हें निर्धारित वेतन नहीं दिया जाता। इसी प्रकार पार्सल हम्मालों, सफाईकर्मियों, बॉक्स लिफ्टरों तथा अमृत भारत योजना के निर्माण कार्यों में लगे श्रमिकों को भी न्यूनतम मजदूरी से कम अथवा संदिग्ध नकद भुगतान किया जा रहा है।

शिकायत में यह भी कहा गया है कि रेलवे से नियमित भुगतान मिलने के बावजूद कई ठेकेदार श्रमिकों का भविष्य निधि और कर्मचारी राज्य बीमा अंशदान जमा नहीं कर रहे हैं। इसे श्रम कानूनों का गंभीर उल्लंघन बताते हुए संबंधित अधिकारियों और ठेकेदारों की जवाबदेही तय करने की मांग की गई है।

एसोसिएशन ने ठेका श्रम (विनियमन एवं उन्मूलन) अधिनियम, वेतन संहिता-2019, न्यूनतम वेतन संबंधी प्रावधानों, संविधान के अनुच्छेद-23 तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम का हवाला देते हुए कहा है कि प्रधान नियोक्ता के रूप में रेलवे प्रशासन भी अपनी जिम्मेदारी से मुक्त नहीं हो सकता।

मुख्य मांगें-

-कोटा मंडल और वैगन रिपेयर शॉप में ठेकेदारों एवं रेल अधिकारियों की मिलीभगत की जांच केंद्रीय सतर्कता आयोग और केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो की स्वतंत्र टीम से कराई जाए।
-पिछले तीन वर्षों के सभी ठेकों के मस्टर रोल, उपस्थिति रजिस्टर और ठेकेदारों के बैंक खातों का फोरेंसिक ऑडिट कराया जाए।
-चिकित्सकीय रिकॉर्ड में दर्ज सभी वेंडरों एवं ठेका श्रमिकों को वैधानिक न्यूनतम वेतन सीधे उनके बैंक खातों में भुगतान कराया जाए।
-भविष्य निधि और कर्मचारी राज्य बीमा अंशदान में गड़बड़ी की जांच कर दोषी ठेकेदारों के विरुद्ध गबन और धोखाधड़ी के प्रकरण दर्ज किए जाएं।
-प्रधान नियोक्ता के रूप में दायित्वों की अनदेखी करने तथा फर्जी बिल पारित करने वाले जिम्मेदार रेल अधिकारियों के विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम एवं सेवा नियमों के तहत कठोर कार्रवाई की जाए।