कोटा: पर्यावरण बचाने का संकल्प- मिट्टी से गणपति बनाने में जुटे 11 कारीगर, दो महीने में तैयार हुईं 1156 प्रतिमाएं, अब घर-घर होगी स्थापना

कोटा: पर्यावरण बचाने का संकल्प- मिट्टी से गणपति बनाने में जुटे 11 कारीगर, दो महीने में तैयार हुईं 1156 प्रतिमाएं, अब घर-घर होगी स्थापना

यतीश व्यास 

कोटा। गणेश चतुर्थी के अवसर पर पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक समरसता का संदेश देने के लिए सर्व हिन्दू समाज सोशल क्रांतिकारी महासंघ एवं इको फ्रेंडली श्री गणपति क्लब की ओर से 1156 मिट्टी की गणेश प्रतिमाओं और 1156 केसरिया धर्म ध्वजाओं का निशुल्क वितरण शुरू किया गया। 

अध्यक्ष गोविंद नारायण अग्रवाल ने बताया कि शहर के 100 वार्डों में पूर्व पंजीकृत परिवारों को 9 और 12 इंच की प्रतिमाएं वितरित की जा रही हैं। अभियान के तहत परिवारों को पर्यावरण संरक्षण का संकल्प भी दिलाया जा रहा है। वहीं, 56 सामाजिक एवं धार्मिक संस्थाओं को सार्वजनिक गणेश पंडालों के लिए 4 और 6 फीट की मिट्टी की प्रतिमाएं दी जाएंगी।

दो महीने में तैयार हुईं 1156 प्रतिमाएं-

संस्थापक महामंत्री राजाराम जैन कर्मयोगी ने बताया कि 1156 प्रतिमाएं बनाने का काम 9 जुलाई से शुरू किया गया था। कारीगर अजय सहित 11 कारीगरों ने करीब दो महीने की मेहनत से इन प्रतिमाओं को तैयार किया है। प्रतिमाओं में कैथून के आसपास से लाई गई काली मिट्टी का उपयोग किया गया है। इन प्रतिमाओं को तैयार करने में करीब 10 लाख रुपए की लागत आई है। इसके अलावा 5 लाख रुपए प्रचार प्रसार के लिए खर्च किए गए हैं। 

उन्होंने बताया कि अभियान के तहत 7 फीट ऊंची और 240 किलो मिट्टी से बनी औषधीय ‘श्री चंदन गणेश’ प्रतिमा भी तैयार की गई है। इस पर 15 किलो औषधीय चंदन पाउडर का लेप किया गया है। प्रतिमा का श्रृंगार प्राकृतिक रंगों और 1200 रुद्राक्ष मालाओं से किया गया है।

महासंघ की ओर से 45 दिवसीय जन-जागरूकता रथ के माध्यम से पीओपी प्रतिमाओं से होने वाले पर्यावरणीय नुकसान के प्रति लोगों को जागरूक किया जा रहा है। अभियान के तहत 2026 में इको-फ्रेंडली गणेश प्रतिमा स्थापित करने वाले 21 सर्वश्रेष्ठ गणेश मंडलों को 5100 रुपए का नगद पुरस्कार दिया जाएगा। महासंघ ने कोटा के गणेश महोत्सव को जिला महोत्सव घोषित करने और गणेश मंडलों को सरकारी अनुदान देने की मांग भी की है।