कोटा: पर्युषण पर्व आत्मशुद्धि और साधना का अवसर- योगेश मुनि

यतीश व्यास 

कोटा। श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ, रामपुरा के तत्वावधान में चातुर्मास के दौरान संतों के नियमित प्रवचन हो रहे हैं। मंगलवार को पूज्य योगेश मुनि ने कहा कि केवल शास्त्रों का ज्ञान प्राप्त कर लेना पर्याप्त नहीं है, बल्कि ज्ञान को अपने आचरण और हृदय में उतारना आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि पर्युषण पर्व आत्मशुद्धि और पाप कर्मों से मुक्ति का अवसर है। परमात्मा की वाणी का चिंतन और जिनवाणी का श्रवण व्यक्ति के आत्मिक उत्थान में सहायक होता है। उन्होंने श्रद्धालुओं से महापुरुषों के बताए मार्ग पर चलने का आह्वान किया।

धर्मसभा में जितेंद्र मुनि ने पर्युषण पर्व को आत्मशुद्धि, संयम और साधना का पर्व बताते हुए शास्त्र श्रवण व आत्मचिंतन का महत्व बताया। वहीं नंदीषेण मुनि ने कहा कि इन आठ दिनों में क्रोध, मान, माया और लोभ जैसे कषायों को नियंत्रित कर धर्म साधना में समय लगाना चाहिए।

संघ अध्यक्ष पंकज मेहता और मंत्री अनिल दक ने बताया कि पर्युषण पर्व के दौरान श्रद्धालु नियमित रूप से प्रवचन सुनकर धर्म आराधना और आत्मचिंतन कर रहे हैं। प्रवचन संत रत्न नंदीषेण मुनि, योगेश मुनि एवं जितेंद्र मुनि के सानिध्य में हो रहे हैं।