राजस्थान सम्पर्क पर 250 करोड़ खर्च, फिर भी नहीं थम रही शिकायतों की कतार, कागजों में निस्तारित हो रही शिकायतें

राजस्थान सम्पर्क पर 250 करोड़ खर्च, फिर भी नहीं थम रही शिकायतों की कतार, कागजों में निस्तारित हो रही शिकायतें

यतीश व्यास 

कोटा। आमजन को सरकारी दफ्तरों के चक्कर से राहत देने के लिए शुरू किए गए राजस्थान सम्पर्क पोर्टल और 181 हेल्पलाइन पर करोड़ों रुपए खर्च किए जा रहे हैं। सरकार के दस्तावेजों के अनुसार राजस्थान सम्पर्क 2.0 के लिए तीन साल की परियोजना पर करीब 247.50 करोड़ रुपए की स्वीकृति दी गई है। इसमें सॉफ्टवेयर, कॉल सेंटर, संचालन और प्रशिक्षण सहित कई मद शामिल हैं।

राजस्थान सम्पर्क पर शिकायत दर्ज करना आसान है। शिकायत संबंधित विभाग तक पहुंचती है और कुछ समय बाद मोबाइल पर संदेश आ जाता है कि शिकायत का निस्तारण कर दिया गया। लेकिन सवाल यह है कि निस्तारण के साथ समस्या भी खत्म होती है या सिर्फ फाइल बंद होती है। 

कोटा के स्टेशन क्षेत्र में गणेशपुरा रोड स्थित शास्त्री कॉलोनी में संचालित आदर्श विद्या निकेतन स्कूल से जुड़ी शिकायतें इसका उदाहरण हैं। स्कूल में फायर एनओसी नहीं होने और चार मंजिला भवन की भवन निर्माण स्वीकृति से संबंधित शिकायतें राजस्थान सम्पर्क पर दर्ज हुईं। संबंधित टीम मौके पर पहुंची, रिपोर्ट लगी और शिकायत का निस्तारण दर्ज कर दिया गया। अब सवाल यह है कि कागजों पर हुई कार्रवाई से जमीन पर समस्या वास्तव में कितनी दूर हुई। 

सरकार की समीक्षा के अनुसार वर्ष 2025 में राजस्थान सम्पर्क पर 34.43 लाख शिकायतें दर्ज हुईं और 33.88 लाख से अधिक का निस्तारण बताया गया। यानी 98 प्रतिशत से ज्यादा निस्तारण। आंकड़ा बड़ा है, लेकिन यदि समस्या वास्तव में खत्म हो रही है तो एक ही विषय पर बार-बार शिकायतें क्यों सामने आती हैं। 

राजस्थान सम्पर्क के पास लाखों शिकायतों का डेटा है। सरकार यह आसानी से पता कर सकती है कि कौन से विभाग के खिलाफ बार-बार शिकायतें आ रही हैं और किन समस्याओं का दोबारा सामना करना पड़ रहा है। शिकायत बंद करना और समस्या खत्म करना दोनों अलग बातें हैं।

जनता के टैक्स के करीब 250 करोड़ रुपए से खड़ी की जा रही इस व्यवस्था की सफलता का पैमाना सिर्फ ‘निस्तारित शिकायतों’ की संख्या नहीं, बल्कि वास्तविक समाधान होना चाहिए। वरना सवाल यही रहेगा राजस्थान सम्पर्क पर शिकायत निस्तारित हुई या सिर्फ फाइल बंद हुई।