धर्म आयोजन अशुभ से शुभ की ओर ले जाते हैं : मुनि योगसागर

धर्म आयोजन अशुभ से शुभ की ओर ले जाते हैं : मुनि योगसागर

यतीश व्यास 

कोटा, 26 अक्टूबर। श्री 1008 कल्पद्रुम महामंडल विधान का समापन सोमवार को शरद पूर्णिमा एवं गुरु उपकार दिवस पर श्रद्धा और भक्ति के साथ हुआ। निर्यापक श्रमण मुनि श्री 108 योगसागर जी महाराज ने कहा कि धार्मिक आयोजन मनुष्य को अशुभ उपयोग से शुभ उपयोग की ओर ले जाते हैं। इनके माध्यम से जीवन में धर्म, संयम, सदाचार और आत्मकल्याण की भावना जागृत होती है। उन्होंने कहा कि जिनवाणी का श्रवण, संतों का सान्निध्य और जिनेंद्र भगवान की भक्ति का अवसर मिलना सौभाग्य है।

शोभायात्रा में दिखी धर्म और संस्कृति की झलक-

समापन अवसर पर भव्य शोभायात्रा निकाली गई। इसमें मुख्य इंद्र-इंद्राणियां पांच आकर्षक बग्घियों में सवार हुए। बिजौलियां से आया श्रीजी का रथ तथा पंजाब का बैंड, बूंदी का मशक बैंड और डीजे आकर्षण का केंद्र रहे। शोभायात्रा में मुनि श्री योगसागर जी महाराज और मुनि श्री प्रणवसागर जी महाराज का सान्निध्य रहा।

आचार्य विद्यासागर जी के योगदान को किया याद-

आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के जीवन और समाजोत्थान के कार्यों पर आधारित झांकियां सजाई गईं। इनमें हथकरघा, प्रतिभास्थली, गौशाला और भाग्योदय तीर्थ जैसे प्रकल्पों के माध्यम से स्वावलंबन, शिक्षा, जीवदया और भारतीय संस्कृति संरक्षण का संदेश दिया गया। वक्ताओं ने आचार्य श्री, नवाचार्य श्री समयसागर जी महाराज और पूज्य पूर्णमति माताजी के आध्यात्मिक योगदान का स्मरण किया। हुकम जैन काका ने आचार्य श्री के राष्ट्रभक्ति, स्वदेशी, मातृभाषा और जीवदया संबंधी विचारों को जन-जन तक पहुंचाने का आह्वान किया।

श्री पुण्योदय अतिशय क्षेत्र में आयोजित धार्मिक अनुष्ठानों में श्रद्धालुओं ने भाग लेकर पुण्यार्जन किया। शांतिधारा, भक्तामर विधान, आहारदान और पूजन-अर्चना सहित विभिन्न धार्मिक क्रियाएं श्रद्धापूर्वक संपन्न हुईं।