उपन्यास ‘जिंदगी की धूप छांव’ का लोकार्पण: महिला लेखन से साहित्य जगत को बड़ी आशाएं- प्रो. शैलेन्द्र

उपन्यास ‘जिंदगी की धूप छांव’ का लोकार्पण: महिला लेखन से साहित्य जगत को बड़ी आशाएं- प्रो. शैलेन्द्र

यतीश व्यास 

कोटा। साहित्यकार रीता गुप्ता के प्रथम उपन्यास ‘जिंदगी की धूप छांव’ का रविवार को एक होटल में आयोजित समारोह में लोकार्पण किया गया। मुख्य अतिथि सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय, उज्जैन के विभागाध्यक्ष एवं कुलानुशासक प्रो. शैलेन्द्र कुमार शर्मा ने कहा कि साहित्य जगत में गुणवत्तापूर्ण महिला लेखन तेजी से सामने आ रहा है, जिससे बड़ी आशाएं हैं। उपन्यास में मध्यमवर्गीय महिला की पीड़ा और संघर्ष को यथार्थपरक ढंग से प्रस्तुत किया गया है। भारतीय नारी सदियों से अपने संघर्षों का सामना करती आई है और यह कृति उसी जीवन संघर्ष को प्रभावी रूप से उजागर करती है।

समारोह की अध्यक्षता राजस्थान साहित्य अकादमी, उदयपुर के सचिव डॉ. बसंत सिंह सोलंकी ने की। उन्होंने कहा कि धूप-छांव हर व्यक्ति के जीवन का हिस्सा है। उपन्यास नारी विमर्श और एक महिला के संघर्ष की कथा को सामने लाता है, जिसमें पात्रों के माध्यम से जीवन की सच्चाइयों को अभिव्यक्त किया गया है।

सारस्वत अतिथि साहित्यकार जितेंद्र निर्मोही ने कहा कि उपन्यास समाज में अवसरवादी प्रवृत्तियों के प्रति सचेत करने के साथ पात्रों के चारित्रिक बदलाव को भी उजागर करता है। उन्होंने रीता गुप्ता को हाड़ौती के महिला लेखन की उभरती हुई महत्वपूर्ण उपन्यासकार बताया।

मुख्य वक्ता कथाकार एवं समीक्षक विजय जोशी ने कहा कि उपन्यास सामाजिक परिवर्तन, विसंगतियों और विडंबनाओं को रेखांकित करता है। इसकी कथा और अंतर्कथाओं के माध्यम से सामाजिक परिवेश की सच्चाइयों तथा जीवन के विभिन्न दृष्टिकोणों को प्रस्तुत किया गया है।

विशिष्ट अतिथि उदयपुर की डॉ. सरिता जैन और स्नेहलता शर्मा ने भी विचार व्यक्त किए। उपन्यासकार रीता गुप्ता ने कहा कि कृति वर्तमान जीवनशैली और उसके प्रभावों के माध्यम से स्त्री चेतना तथा समाज परिवर्तन के सकारात्मक प्रयासों को अभिव्यक्त करती है। उन्होंने प्रकाशन सहयोग के लिए राजस्थान साहित्य अकादमी का आभार जताया। कवि महेश पंचोली ने संचालन किया। समारोह में विभिन्न साहित्यिक संस्थाओं और साहित्यकारों ने लेखिका का अभिनंदन किया।