छात्रों की गूंज में प्रहलाद गुंजल की भीड़ ने बदला कार्यक्रम का पूरा माहौल, उम्मेद क्लब से निकला जनसैलाब, भाषण खत्म होते ही कार्यकर्ताओं के साथ लौटे गुंजल, कार्यक्रम स्थल हुआ लगभग खाली

छात्रों की गूंज में प्रहलाद गुंजल की भीड़ ने बदला कार्यक्रम का पूरा माहौल, उम्मेद क्लब से निकला जनसैलाब, भाषण खत्म होते ही कार्यकर्ताओं के साथ लौटे गुंजल, कार्यक्रम स्थल हुआ लगभग खाली

यतीश व्यास 

कोटा। कांग्रेस के छात्रों की गूंज अभियान के तहत आयोजित कलेक्ट्रेट घेराव कार्यक्रम में पूर्व विधायक एवं कांग्रेस नेता प्रहलाद गुंजल सबसे अधिक चर्चा में रहे। उम्मेद क्लब से उनके नेतृत्व में हजारों कार्यकर्ताओं और समर्थकों का जनसैलाब निकला, जिसने पूरे कार्यक्रम की तस्वीर बदल दी। रैली के दौरान सड़कें समर्थकों से भर गईं और गुंजल के समर्थन में लगातार नारे गूंजते रहे।

कार्यक्रम से पहले कई नेताओं ने बड़ी संख्या में कार्यकर्ता लाने के दावे किए थे, लेकिन मौके पर तस्वीर अलग दिखाई दी। कई नेता 50 से 75 समर्थकों के साथ पहुंचे, जबकि कुछ नेताओं के साथ गिने-चुने कार्यकर्ता ही नजर आए। भीड़ जुटाने के बड़े-बड़े दावे धरातल पर कमजोर साबित होते दिखाई दिए।

रैली के दौरान यह भी देखने को मिला कि रास्ते में कुछ नेताओं के समर्थक प्रहलाद गुंजल की रैली में शामिल हो गए, जिससे मुख्य रैली का आकार और भी बड़ा होता गया। राजनीतिक गलियारों में इसकी चर्चा रही कि जिन नेताओं ने बड़ी भीड़ का दावा किया था, वे अंततः गुंजल के जनसमर्थन के सहारे ही अपनी मौजूदगी दर्ज कराने की कोशिश करते नजर आए।

कार्यक्रम का सबसे उल्लेखनीय दृश्य उस समय सामने आया जब प्रहलाद गुंजल ने मंच से अपना संबोधन समाप्त किया। उनके मंच से उतरते ही बड़ी संख्या में कार्यकर्ता और समर्थक भी उनके साथ कार्यक्रम स्थल से निकल गए। देखते ही देखते भीड़ काफी कम हो गई और वहां केवल चंद लोग ही शेष रह गए। इसके बाद मंच पर मौजूद नेताओं ने भी कार्यक्रम को जल्द समाप्त करना उचित समझा।

पूरे आयोजन के बाद राजनीतिक हलकों में सबसे अधिक चर्चा इसी बात की रही कि छात्रों की गूंज अभियान में यदि किसी नेता ने अपनी संगठन क्षमता और जनाधार का प्रभाव सबसे मजबूती से दिखाया, तो वह प्रहलाद गुंजल रहे। उनकी रैली, भीड़ और कार्यकर्ताओं का उत्साह पूरे कार्यक्रम का सबसे प्रमुख आकर्षण बनकर उभरा।