कोटा में कैसे गूंजेगा कांग्रेस का ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम? 500-200 कार्यकर्ता लाने के दावे… क्या जमीनी हकीकत भी देगी साथ? पढ़ें इनसाइड स्टोरी…

कोटा में कैसे गूंजेगा कांग्रेस का ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम? 500-200 कार्यकर्ता लाने के दावे… क्या जमीनी हकीकत भी देगी साथ?  पढ़ें इनसाइड स्टोरी…

यतीश व्यास 

कोटा। राहुल गांधी के “छात्रों की गूंज” कार्यक्रम के तहत 1 अगस्त को प्रस्तावित कोटा कलेक्ट्रेट घेराव को लेकर जिला कांग्रेस कमेटी कार्यालय में मंगलवार को तैयारियों की बैठक आयोजित की गई। बैठक में गुजरात कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष एवं कार्यक्रम के प्रभारी जिग्नेश मेवाणी, कोटा संभाग के संयोजक एवं प्रभारी पुष्पेंद्र भारद्वाज, शहर एवं देहात कांग्रेस के पदाधिकारियों सहित वरिष्ठ नेता मौजूद रहे।

बैठक में कार्यक्रम में अधिक से अधिक भीड़ जुटाने पर जोर दिया गया। सूत्रों के अनुसार कई नेताओं ने सैकड़ों कार्यकर्ताओं को साथ लाने का दावा किया। किसी ने 500 तो किसी ने 200 कार्यकर्ता लाने की बात कही। हालांकि राजनीतिक गलियारों में इन दावों को लेकर चर्चाओं का दौर भी शुरू हो गया। कई कार्यकर्ताओं का मानना है कि जिन नेताओं ने बड़ी संख्या का दावा किया, उनकी जमीनी पकड़ उतनी मजबूत नहीं दिखती।

सूत्रों के मुताबिक एक कार्यकर्ता ने जिग्नेश मेवाणी के सामने यह तक कह दिया कि शहर में केवल एक ऐसे नेता हैं, जिनके एक आह्वान पर बड़ी संख्या में कार्यकर्ता स्वतः जुट जाते हैं। यदि वास्तव में बड़ी भीड़ दिखानी है तो उनसे संपर्क करना चाहिए। हालांकि इस कथित टिप्पणी की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।

जानकारों का कहना है कि कोटा कांग्रेस लंबे समय से गुटबाजी और आंतरिक खींचतान से जूझ रही है। पिछले कई आंदोलनों, धरना-प्रदर्शनों और संगठनात्मक कार्यक्रमों में भी शहर और देहात कांग्रेस के नेता अलग-अलग मंचों पर नजर आए हैं। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि जब संगठन के भीतर ही पूरी एकजुटता दिखाई नहीं दे रही, तब एक अगस्त को प्रस्तावित छात्रों की गूंज कार्यक्रम के लिए बैठक में किए गए बड़ी संख्या में भीड़ जुटाने के दावे जमीनी स्तर पर कितने सफल साबित होंगे।

संगठन पर काबिज नेता कितनी ताकत रखते हैं, यह सब जानते हैं। और जो नेता वास्तव में ताकत रखता है, उससे ये दूरी बनाकर रखते हैं। 500 और 200 कार्यकर्ताओं को लाने के दावे करने वालों की शहर में क्या स्थिति है, यह भी सब जानते हैं। बड़े-बड़े दावे करने वाले 1 अगस्त को कितने लोग ला पाएंगे, यह समय बताएगा।