कैंसर से डर नहीं, जागरूकता और समय पर जांच है बचाव का सबसे बड़ा हथियार- डॉ असीम सामर हाड़ौती सर्जिकल सोसायटी की सीएमई में विशेषज्ञों ने बताए आधुनिक उपचार के विकल्प, नई तकनीकों से मरीजों को मिल रही बेहतर जिंदगी

कैंसर से डर नहीं, जागरूकता और समय पर जांच है बचाव का सबसे बड़ा हथियार- डॉ असीम सामर   हाड़ौती सर्जिकल सोसायटी की सीएमई में विशेषज्ञों ने बताए आधुनिक उपचार के विकल्प, नई तकनीकों से मरीजों को मिल रही बेहतर जिंदगी

यतीश व्यास 

कोटा। कैंसर का नाम सुनते ही मन में डर पैदा होना स्वाभाविक है, लेकिन चिकित्सा क्षेत्र में हुई प्रगति ने अब इस बीमारी की तस्वीर बदल दी है। समय पर पहचान और आधुनिक उपचार के जरिए कैंसर को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। शुरुआती चरण में बीमारी का पता लग जाए तो अधिकांश मरीज उपचार के बाद पूरी तरह स्वस्थ होकर सामान्य जीवन जी सकते हैं।

हाड़ौती सर्जिकल सोसायटी की ओर से आयोजित सतत चिकित्सा शिक्षा कार्यक्रम (सीएमई) में सीके बिरला हॉस्पिटल जयपुर के वरिष्ठ कैंसर रोग विशेषज्ञ डॉ. असीम समर ने कहा कि समाज में कैंसर को लेकर फैले डर और भ्रम को दूर करने की जरूरत है। उन्होंने बताया कि आधुनिक चिकित्सा में टारगेटेड थेरेपी, इम्यूनोथेरेपी और एंटीबॉडी-ड्रग कॉन्जुगेट्स जैसी नई तकनीकों ने कैंसर उपचार को अधिक प्रभावी और सुरक्षित बनाया है।

डॉ. सामर ने कहा कि ये अत्याधुनिक उपचार कैंसर कोशिकाओं को सीधे निशाना बनाते हैं, जिससे शरीर की सामान्य कोशिकाओं को कम नुकसान पहुंचता है और मरीजों को होने वाले दुष्प्रभाव भी कम होते हैं। उन्होंने बताया कि अब चौथे चरण के कई कैंसर मरीज भी बेहतर उपचार के कारण लंबे समय तक गुणवत्तापूर्ण जीवन जी रहे हैं।

बदलती जीवनशैली बढ़ा रही कैंसर का खतरा-

रेडिएशन ऑन्कोलॉजी एवं रेडियोसर्जरी विशेषज्ञ डॉ. रूचिर भंडारी ने कहा कि बदलती जीवनशैली कैंसर के बढ़ते मामलों का बड़ा कारण बन रही है। धूम्रपान, तंबाकू और शराब का सेवन, मोटापा, व्यायाम की कमी और अनियमित दिनचर्या से कैंसर का खतरा बढ़ता है।

उन्होंने पर्यावरण प्रदूषण, खाद्य पदार्थों में मिलावट और माइक्रोप्लास्टिक को भी स्वास्थ्य के लिए गंभीर चिंता का विषय बताया। डॉ. भंडारी ने कहा कि करीब 10 प्रतिशत कैंसर मामलों में आनुवंशिक कारण भी जिम्मेदार होते हैं।

उन्होंने बताया कि विकसित देशों में नियमित स्क्रीनिंग और जागरूकता के कारण कैंसर की पहचान शुरुआती अवस्था में हो जाती है, जबकि भारत में अभी भी बड़ी संख्या में मरीज तीसरी और चौथी स्टेज में अस्पताल पहुंचते हैं। उन्होंने लोगों से नियमित स्वास्थ्य जांच करवाने और शरीर में होने वाले असामान्य बदलावों को नजरअंदाज नहीं करने की अपील की।

कार्यक्रम का संचालन हाड़ौती कैंसर सोसायटी के सचिव डॉ. दिनेश जिंदल ने किया। इस अवसर पर हाड़ौती सर्जिकल सोसायटी के अध्यक्ष डॉ. राकेश शर्मा, सचिव डॉ. दिनेश जिंदल सहित बड़ी संख्या में सर्जन और चिकित्सा विशेषज्ञ मौजूद रहे। सीएमई में कैंसर की रोकथाम, शुरुआती जांच और आधुनिक उपचार पद्धतियों पर विशेषज्ञों ने विचार साझा किए।