कोटा: युवाओं की मानसिक शक्ति बढ़ाने का केंद्र बनी RTU की थॉट लैब, पत्रकारों ने नवाचार और मेडिटेशन मॉडल का किया अवलोकन

कोटा: युवाओं की मानसिक शक्ति बढ़ाने का केंद्र बनी RTU की थॉट लैब, पत्रकारों ने नवाचार और मेडिटेशन मॉडल का किया अवलोकन

कोटा। राजस्थान तकनीकी विश्वविद्यालय (आरटीयू) परिसर स्थित ब्रह्माकुमारीज़ एवं आरटीयू के संयुक्त प्रयास से विकसित थॉट एंड इनोवेशन सेंटर (थॉट लैब) का जर्नलिस्ट एसोसिएशन ऑफ राजस्थान (जार) के प्रदेश उपाध्यक्ष यतीश व्यास एवं कोटा जिला अध्यक्ष संजय चौबीसा ने भ्रमण कर वहां संचालित गतिविधियों और नवाचारों की जानकारी प्राप्त की।

भ्रमण के दौरान सेंटर के वॉलंटियर एवं फैकल्टी बीके प्रदीप ने थॉट लैब में स्थापित आधुनिक वैज्ञानिक उपकरणों की जानकारी देते हुए बताया कि ये तकनीकें विद्यार्थियों की एकाग्रता, ध्यान क्षमता, मानसिक संतुलन, फोकस और तनाव प्रबंधन को बेहतर बनाने में सहायक हैं। उन्होंने कहा कि राजयोग मेडिटेशन एवं इन तकनीकों के नियमित अभ्यास से विद्यार्थियों की अध्ययन क्षमता और व्यक्तित्व में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहे हैं।

इस अवसर पर डॉ. कृष्णा एवं बीके कृति ने वैज्ञानिक प्रदर्शनी का अवलोकन कराया। प्रदर्शनी में मानव मस्तिष्क की कार्यप्रणाली, विचारों की शक्ति, भावनात्मक संतुलन, तनाव प्रबंधन तथा मेडिटेशन के वैज्ञानिक पहलुओं को विभिन्न मॉडलों और प्रदर्शनों के माध्यम से समझाया गया।

थॉट एंड इनोवेशन सेंटर की मुख्य समन्वयक लता गिडवानी ने बताया कि केंद्र वैज्ञानिक तकनीकों और आध्यात्मिक मूल्यों के समन्वय के माध्यम से विद्यार्थियों, शिक्षकों, वैज्ञानिकों, प्रोफेसरों एवं आमजन के लिए कार्य कर रहा है। यहां समय-समय पर व्यक्तित्व विकास, तनाव मुक्ति, नेतृत्व क्षमता, ध्यान एवं नवाचार विषयक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।

सेंटर ऑपरेटर विनोद गोचर ने बताया कि राजयोग मेडिटेशन के माध्यम से अनेक लोग मानसिक शांति, आत्मविश्वास और जीवन में संतुलन का अनुभव कर रहे हैं।

भ्रमण के दौरान सेंटर के वॉलंटियर मनोज, विष्णु, नवीन, नितेश, कुणाल एवं अमृता बहन ने अतिथियों का तिलक लगाकर एवं पुष्पगुच्छ भेंट कर स्वागत किया।

भ्रमण के पश्चात जार पदाधिकारियों ने थॉट लैब की पहल की सराहना करते हुए कहा कि आधुनिक विज्ञान और राजयोग मेडिटेशन का यह समन्वय विद्यार्थियों एवं युवाओं के सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। उन्होंने इसे शिक्षा और समाज के लिए उपयोगी, प्रेरणादायी एवं समय की आवश्यकता बताया।