महारास जीव और शिव के मिलन का प्रतीक, गोपी प्रेम मोक्ष का मार्ग- आचार्य ऋतुराज गौतम

महारास जीव और शिव के मिलन का प्रतीक, गोपी प्रेम मोक्ष का मार्ग- आचार्य ऋतुराज गौतम

यतीश व्यास 

कोटा। विज्ञान नगर स्थित माहेश्वरी भवन में चल रहे श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ सप्ताह के छठे दिन कथा व्यास आचार्य ऋतुराज गौतम ने महारास और गोपी प्रेम के आध्यात्मिक रहस्यों का भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने कहा कि गोपियों का प्रेम निष्काम प्रेम का सर्वोच्च उदाहरण है, जो बंधन नहीं बल्कि मुक्ति और मोक्ष का मार्ग है।

आचार्य गौतम ने महारास प्रसंग की व्याख्या करते हुए कहा कि हृदय में स्थित निराकार परमात्मा का साकार स्वरूप में प्रकट होकर जीव से एकत्व स्थापित करना ही महारास है। आध्यात्मिक दृष्टि से यह जीव और शिव के मिलन का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण के प्रति गोपियों का वियोग भी निष्काम प्रेम के कारण योग का स्वरूप धारण कर लेता है।

कथा में अक्रूर की ब्रज यात्रा, कंस वध और उद्धव के ब्रज गमन जैसे प्रसंगों का भी वर्णन किया गया, जिसे सुनकर श्रद्धालु भाव-विभोर हो गए। मुख्य यजमान भगवानदास माहेश्वरी और रमेश माहेश्वरी ने बताया कि कथा श्रवण के लिए कोटा दक्षिण विधायक संदीप शर्मा तथा माहेश्वरी समाज के अध्यक्ष राजेश कृष्ण बिरला भी उपस्थित रहे।

भगवान श्रीकृष्ण-रुक्मिणी विवाह प्रसंग पर आचार्य गौतम ने कहा कि विवाह सनातन धर्म के 16 संस्कारों में 15वां संस्कार है। प्रत्येक व्यक्ति को धर्मसम्मत विवाह कर विवाह धर्म का पालन करना चाहिए। वहीं स्यमंतक मणि प्रसंग का उल्लेख करते हुए उन्होंने समाजहित में दान की महत्ता बताई और कहा कि व्यक्ति को अपनी आय एवं संपत्ति का एक हिस्सा समाज के उत्थान के लिए समर्पित करना चाहिए। इस अवसर पर भगवान श्रीकृष्ण-रुक्मिणी विवाह की आकर्षक झांकी सजाई गई।

कथा समापन पर महाआरती का आयोजन हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लेकर धर्म लाभ अर्जित किया। इसके बाद सभी श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया।