कोटा- क्या पुलिस की नाकाबंदी सिर्फ आम लोगों के लिए है, अपराधी तो नहीं निकल जाते बेखौफ?, नाकाबंदी में काली फिल्म और नंबर प्लेट तो मिल जाती है, क्या कभी मिला कोई हार्डकोर अपराधी?

कोटा- क्या पुलिस की नाकाबंदी सिर्फ आम लोगों के लिए है, अपराधी तो नहीं निकल जाते बेखौफ?, नाकाबंदी में काली फिल्म और नंबर प्लेट तो मिल जाती है, क्या कभी मिला कोई हार्डकोर अपराधी?

यतीश व्यास 

कोटा। राजस्थान पुलिस का विशेष सड़क सुरक्षा अभियान पूरे प्रदेश में जोर-शोर से चल रहा है। ब्लैक फिल्म, नंबर प्लेट, हूटर, प्रेशर हॉर्न और मॉडिफाइड वाहनों के खिलाफ हजारों चालान काटे जा रहे हैं। पांचवें दिन 7,249 वाहन चालक पुलिस के रडार पर आए, जबकि अकेले कोटा शहर में 1,079 वाहनों पर कार्रवाई की गई।

हालांकि इस अभियान के बीच एक बड़ा सवाल भी उठ रहा है। क्या इन नाकाबंदियों और चेकिंग अभियानों के दौरान पुलिस ने किसी बड़े अपराधी, वांछित बदमाश या हथियार लेकर घूम रहे अपराधी को भी पकड़ा है। लोगों का कहना है कि पुलिस का पूरा फोकस वाहन चालकों की तकनीकी कमियों पर दिखाई देता है, जबकि अपराध नियंत्रण का मूल उद्देश्य कहीं पीछे छूटता नजर आ रहा है। सड़कों पर घंटों रुकवाकर आम नागरिकों के दस्तावेज और वाहनों की जांच तो हो रही है, लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि इन अभियानों से अपराधियों पर कितना शिकंजा कसा गया। 

कहीं ऐसा तो नहीं कि नाकाबंदियों के बीच हार्डकोर अपराधी और हथियारबंद बदमाश आसानी से निकल जाते हों, जबकि कार्रवाई का बोझ केवल आम वाहन चालकों पर पड़ रहा हो।

सड़क सुरक्षा जरूरी है, लेकिन इन अभियानों से अपराधियों पर कितनी चोट पहुंची और कानून-व्यवस्था को कितना लाभ मिला यह जनता जानना चाहती है।