कोटा- एमबीएस अस्पताल में 4 वर्षीय बच्ची का कोकलियर इम्प्लांट, जन्म से सुनने और बोलने में असमर्थ थी बच्ची

कोटा- एमबीएस अस्पताल में 4 वर्षीय बच्ची का कोकलियर इम्प्लांट, जन्म से सुनने और बोलने में असमर्थ थी बच्ची

यतीश व्यास 

कोटा। जन्म से सुनने और बोलने में असमर्थ 4 वर्षीय दिव्यांग बच्ची ईलारिया खान को एमबीएस अस्पताल में नई जिंदगी की उम्मीद मिली है। अस्पताल के ईएनटी विभाग में उसका सफल कोकलियर इम्प्लांट ऑपरेशन किया गया है। यह एमबीएस अस्पताल में किया गया 21वां कोकलियर इम्प्लांट है।

ईएनटी विभागाध्यक्ष एवं वरिष्ठ प्रोफेसर डॉ. शिवकुमार ने बताया कि ईलारिया खान, पुत्री शादाब खान, जन्म से सुन नहीं पा रही थी, जिसके कारण उसकी बोलने की क्षमता भी विकसित नहीं हो सकी। राज्य सरकार की योजना के तहत करीब चार लाख रुपये मूल्य का कोकलियर इम्प्लांट पूरी तरह निशुल्क लगाया गया।

डॉ. शिवकुमार ने बताया कि ऑपरेशन के बाद लगभग एक से डेढ़ माह में इम्प्लांट को सक्रिय (स्विच ऑन) किया जाएगा। इसके बाद बच्ची को दो से तीन वर्षों तक स्पीच थेरेपी भी राज्य सरकार की ओर से उपलब्ध कराई जाएगी, जिससे वह धीरे-धीरे सुनना, समझना और बोलना सीख सकेगी।

उन्होंने बताया कि नवजात शिशुओं की सुनने की क्षमता की जांच (ओएई टेस्ट) प्रदेश के अधिकांश सरकारी अस्पतालों में निशुल्क की जाती है। यह जांच कुछ ही मिनटों में पूरी हो जाती है। यदि इस जांच में सुनने की समस्या की आशंका सामने आती है तो बीईआरए जांच के माध्यम से यह सुनिश्चित किया जाता है कि बच्चा सही तरीके से सुन पा रहा है या नहीं।

डॉ. शिवकुमार ने बताया कि ध्वनि कान के माध्यम से सुनने वाली नसों द्वारा मस्तिष्क तक पहुंचती है। मस्तिष्क इन संकेतों को समझकर सुनने और बोलने की क्षमता विकसित करता है। यदि बच्चे की सुनने की क्षमता समय पर विकसित नहीं होती तो उसके बोलने में भी परेशानी आ सकती है।