कोटा- अपना घर आश्रम ने मिलाया बिछड़ा परिवार, दो साल बाद पिता से मिला बेटा

कोटा- अपना घर आश्रम ने मिलाया बिछड़ा परिवार, दो साल बाद पिता से मिला बेटा

यतीश व्यास 

कोटा 21 मई। करीब दो वर्ष से अपने परिवार से बिछड़े एक वृद्ध की अपने बेटे से मुलाकात अपना घर आश्रम में हुई। पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग निवासी त्रिवेणी पासवान को डेढ़ वर्ष पूर्व केशवराय पाटन क्षेत्र में लावारिस हालत में भटकते हुए पाया गया था। इसके बाद उन्हें अपना घर आश्रम में आश्रय दिया गया।

आश्रम पहुंचने पर त्रिवेणी पासवान अपनी याददाश्त खो चुके थे। वे केवल अपना नाम बता पा रहे थे और परिवार या घर के बारे में कोई जानकारी नहीं दे सके। आश्रम के चिकित्सकों और विशेषज्ञों ने लगातार उपचार, देखरेख और मनोवैज्ञानिक काउंसलिंग की, जिसके बाद धीरे-धीरे उनकी स्मृति लौटने लगी।

कुछ समय बाद उन्होंने बताया कि वे पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग के रहने वाले हैं। आश्रम प्रबंधन ने उनके बताए पते और जानकारी के आधार पर संपर्क साधा। जांच में पता चला कि वे श्याम पासवान के पिता हैं। सूचना मिलते ही पुत्र श्याम पासवान अपने रिश्तेदार अनमोल कुमार के साथ दार्जिलिंग से कोटा पहुंच गए।

अपना घर आश्रम में जैसे ही पिता और पुत्र आमने-सामने आए, दोनों की आंखें नम हो गईं। दो वर्षों का दर्द और बिछोह एक-दूसरे के गले लगते ही भावनाओं में बदल गया।
श्याम पासवान ने बताया कि उनके पिता लंबे समय से मानसिक अस्वस्थता से जूझ रहे थे और करीब दो वर्ष पहले अचानक घर से लापता हो गए थे। परिवार ने उन्हें हर जगह तलाशा, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला। उन्होंने कहा कि हमने उम्मीद छोड़ दी थी, लेकिन अपना घर आश्रम ने हमारे परिवार को फिर से जोड़ दिया। हम जीवनभर आश्रम के आभारी रहेंगे।

अपना घर आश्रम की ओर से डॉ. योगेन्द्र मणि कौशिक ने बताया कि आश्रम निराश्रित और असहाय लोगों को न केवल आश्रय देता है, बल्कि उन्हें उनके परिवारों से मिलाने का भी लगातार प्रयास करता है।