कोटा- बधाई के नाम पर वसूली नहीं चलेगी, किन्नरों की मनमानी पर रोक लगाने प्रशासन के पास पहुंची ट्रांसजेंडर आइकॉन नैना देवी, एडीएम को सौंपा ज्ञापन

कोटा- बधाई के नाम पर वसूली नहीं चलेगी, किन्नरों की मनमानी पर रोक लगाने प्रशासन के पास पहुंची ट्रांसजेंडर आइकॉन नैना देवी, एडीएम को सौंपा ज्ञापन

यतीश व्यास 

कोटा 20 मई। शहर में मांगलिक अवसरों पर किन्नर समाज द्वारा बधाई और नेक के नाम पर की जा रही कथित मनमानी वसूली को लेकर मामला अब प्रशासन तक पहुंच गया है। जिला ट्रांसजेंडर आइकॉन मंगलमुखी नैना देवी ने एडीएम सिटी को ज्ञापन सौंपकर इस व्यवस्था को नियंत्रित करने, सर्वे करवाने तथा सर्व समाज की सहमति से तय राशि लागू करवाने की मांग की है।

ज्ञापन में बताया गया कि लंबे समय से शहर में बधाई राशि को लेकर लोगों की शिकायतें सामने आ रही थीं। इसी के समाधान के लिए 12 मई को कुन्हाड़ी स्थित किन्नर इन्दू बाई के निवास पर सर्व हिन्दू समाज सोशल क्रांतिकारी महासंघ और शहर के सात मंगलमुखी समूहों के बीच करीब तीन घंटे तक बैठक आयोजित हुई थी। बैठक में महासंघ के संस्थापक सदस्य एवं मुख्य संयोजक गोविन्द नारायण अग्रवाल, संस्थापक महामंत्री राजाराम जैन कर्मयोगी सहित प्रतिनिधिमंडल मौजूद रहा।

बैठक में किन्नर प्रमुख तारा देवी, रीना खान, ममता बाई, इन्दू बाई, मनीषा बाई, ज्योति बाई, शेफाली और मंगलमुखी नैना देवी सहित अन्य सदस्यों की मौजूदगी में बधाई राशि को लेकर सहमति बनी थी। इसमें मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए 1100 रुपए से 5100 रुपए तथा सम्पन्न परिवारों के लिए 5100 रुपए से 11 हजार रुपए तक राशि तय की गई थी। साथ ही जजमान के घर बधाई लेने पहुंचने का समय सुबह 9 बजे से दोपहर 2 बजे तक निर्धारित किया गया था। इस समझौते को एडवोकेट नरेन्द्र डाबी द्वारा दस्तावेजी रूप दिया गया।

ज्ञापन में आरोप लगाया गया कि अगले ही दिन कई किन्नर समूह इस समझौते से पीछे हट गए और तय राशि लेने से इनकार करते हुए मनमानी तरीके से अधिक रकम मांगने लगे। नैना देवी ने कहा कि शहर में कई स्थानों पर बधाई और नेक के नाम पर लोगों पर दबाव बनाकर 51 हजार से लेकर एक लाख रुपए तक तथा सोने के जेवर मांगने जैसी शिकायतें सामने आ रही हैं, जिससे आमजन में भय और असहजता का माहौल बन रहा है।

ज्ञापन में जिला प्रशासन से मांग की गई है कि पूरे शहर में सर्वे करवाकर लोगों की वास्तविक पीड़ा सामने लाई जाए तथा जबरन वसूली और अभद्र व्यवहार पर प्रतिबंध लगाया जाए। साथ ही सर्व समाज की सहमति से तय की गई राशि को लागू करवाकर व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि आमजन में भय समाप्त हो और किन्नर समाज को भी सम्मानजनक पहचान मिल सके।