कोटा- हनीट्रैप से ब्लैकमेल कर लाखों की वसूली करने वाला गिरोह बेनकाब, दो महिलाओं सहित 6 आरोपी गिरफ्तार, वीडियो बनाकर दिखाया बदनामी का डर, 90 हजार वसूले और पैसों के लिए बना रहे थे दबाव

कोटा- हनीट्रैप से ब्लैकमेल कर लाखों की वसूली करने वाला गिरोह बेनकाब, दो महिलाओं सहित 6 आरोपी गिरफ्तार, वीडियो बनाकर दिखाया बदनामी का डर, 90 हजार वसूले और पैसों के लिए बना रहे थे दबाव

यतीश व्यास 


कोटा 25 अप्रेल। पुलिस ने हनीट्रैप के जरिए लोगों को जाल में फंसाकर अवैध वसूली करने वाले एक संगठित गिरोह का पर्दाफाश किया है। इस कार्रवाई में दो महिलाओं सहित कुल छह आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने इनके कब्जे से एक स्विफ्ट कार और 49 हजार 500 रुपये नकद बरामद किए हैं।

23 अप्रैल को पीड़ित ने पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराई, जिसमें उसने बताया कि 14 अप्रैल को एक महिला ने उसे फोन कर मिलने के लिए बुलाया। जब वह तय स्थान पर पहुंचा तो वहां मौजूद दो महिलाओं और उनके साथियों ने साजिश के तहत उसकी आपत्तिजनक वीडियो बना ली। इसके बाद आरोपियों ने वीडियो वायरल करने और झूठे दुष्कर्म के मामले में फंसाने की धमकी देकर उससे 90 हजार रुपये वसूल लिए और लगातार और पैसे की मांग कर रहे थे।

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक तेजस्वनी गौतम के निर्देशन में विशेष टीम गठित की गई। टीम ने राष्ट्रीय राजमार्ग-27 के नीचे डाडदेवी रोड पर नाकाबंदी कर संदिग्ध कार को घेर लिया और सभी छह आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। 

जांच में सामने आया कि गिरोह सुनियोजित तरीके से वारदात को अंजाम देता था, जिसमें महिला सदस्य अनजान लोगों को फोन कर बातचीत में उलझाकर उन्हें किसी सुनसान या निजी स्थान पर बुलाती थीं। वहां पहुंचने पर पीड़ित को भरोसे में लेकर आपत्तिजनक स्थिति में लाया जाता था और इसी दौरान गिरोह के अन्य सदस्य छिपकर मोबाइल से वीडियो रिकॉर्ड कर लेते थे। बाद में इसी वीडियो के आधार पर सामाजिक बदनामी और झूठे कानूनी मामले में फंसाने की धमकी देकर पीड़ित पर मानसिक दबाव बनाया जाता था और उससे नकद व ऑनलाइन माध्यम से पैसे वसूले जाते थे। एक बार पैसे मिलने के बाद भी गिरोह लगातार दबाव बनाकर और रकम ऐंठता रहता था।

पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि गिरोह पूरी तरह संगठित था, जिसमें महिलाओं की भूमिका लोगों को फंसाने की थी, जबकि पुरुष सदस्य वीडियो बनाकर डराने-धमकाने और वसूली का काम करते थे। वारदात को अंजाम देने और फरार होने के लिए निजी वाहन का उपयोग किया जाता था।