कोटा: वार्ड 39 में दो पूर्व पार्षदों की टक्कर, कांग्रेस को चेतना माथुर के पुराने चुनावी अनुभव पर भरोसा, भाजपा प्रत्याशी को लेकर कुछ क्षेत्रों में नाराजगी की चर्चा

कोटा: वार्ड 39 में दो पूर्व पार्षदों की टक्कर, कांग्रेस को चेतना माथुर के पुराने चुनावी अनुभव पर भरोसा, भाजपा प्रत्याशी को लेकर कुछ क्षेत्रों में नाराजगी की चर्चा

यतीश व्यास 

कोटा। नगर निगम चुनाव में वार्ड नंबर 39 का मुकाबला इस बार खासा रोचक हो गया है। यहां कांग्रेस ने पूर्व पार्षद चेतना माथुर को मैदान में उतारा है, जबकि भाजपा ने भी पूर्व पार्षद आशा चतुर्वेदी पर दांव लगाया है। ऐसे में वार्ड 39 में मुकाबला दो अनुभवी महिला नेताओं के बीच हो रहा है और दोनों दलों ने इस सीट को प्रतिष्ठा का सवाल बना लिया है।

चेतना माथुर नगर निगम की राजनीति में अपना अनुभव रखती हैं। वर्ष 2020 के नगर निगम चुनाव में उन्होंने कोटा उत्तर नगर निगम के वार्ड नंबर 60 से कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में चुनाव जीतकर पार्षद पद हासिल किया था। उस चुनाव में चेतना माथुर को 1,011 मत मिले थे और उन्होंने भाजपा प्रत्याशी राजकुमारी व्यास को 135 मतों के अंतर से पराजित किया था। अब नए परिसीमन के बाद बदले वार्ड नंबर 39 में कांग्रेस ने एक बार फिर उन पर भरोसा जताया है।

दूसरी ओर भाजपा प्रत्याशी आशा चतुर्वेदी भी पूर्व पार्षद हैं और उन्हें नगर निगम की कार्यप्रणाली तथा स्थानीय राजनीति का अनुभव है। भाजपा को उम्मीद है कि उनके राजनीतिक अनुभव और संगठन की ताकत के सहारे वार्ड 39 में पार्टी मजबूत मुकाबला पेश करेगी। हालांकि चुनावी मैदान में उतरने के साथ ही आशा चतुर्वेदी को कुछ क्षेत्रों में विरोध और नाराजगी का सामना भी करना पड़ रहा है।

स्थानीय स्तर पर खासतौर पर महिलाओं के एक वर्ग में आशा चतुर्वेदी के प्रति नाराजगी की चर्चा है। कुछ मतदाताओं का कहना है कि पिछले कई वर्षों से उनका आमजन से सीधा और निरंतर संपर्क नहीं रहा, जिसके कारण चुनाव के दौरान उन्हें नए सिरे से जनता के बीच अपनी पकड़ मजबूत करनी पड़ रही है। हालांकि भाजपा समर्थक इसे चुनावी माहौल का हिस्सा बताते हुए पार्टी प्रत्याशी की जीत का दावा कर रहे हैं।

वहीं कांग्रेस चेतना माथुर के पक्ष में उनके पिछले चुनावी रिकॉर्ड, पार्षद के अनुभव और क्षेत्र में सक्रिय जनसंपर्क को अपनी बड़ी ताकत मान रही है। नए परिसीमन के कारण वार्ड की भौगोलिक और सामाजिक संरचना जरूर बदली है, लेकिन कांग्रेस कार्यकर्ताओं का मानना है कि चेतना माथुर की पहचान और जनता से जुड़ाव उन्हें चुनावी मुकाबले में बढ़त दिला सकता है।

वार्ड 39 में अब मुकाबला सिर्फ कांग्रेस और भाजपा के बीच नहीं, बल्कि दो पूर्व पार्षदों के राजनीतिक अनुभव और जनता के बीच उनकी मौजूदा स्वीकार्यता की परीक्षा भी बन गया है। एक ओर कांग्रेस की चेतना माथुर पुराने जीत के अनुभव के साथ मैदान में हैं तो दूसरी ओर भाजपा की आशा चतुर्वेदी अपनी राजनीतिक पृष्ठभूमि और संगठन की ताकत के सहारे चुनौती पेश कर रही हैं।

चुनावी प्रचार तेज होने के साथ वार्ड 39 की तस्वीर लगातार साफ होती जाएगी, लेकिन फिलहाल कांग्रेस खेमे में चेतना माथुर को मिल रहे समर्थन को लेकर उत्साह नजर आ रहा है। वहीं भाजपा के सामने आशा चतुर्वेदी के प्रति कुछ क्षेत्रों में उभर रही नाराजगी को दूर कर मतदाताओं का भरोसा मजबूत करने की चुनौती बनी हुई है।