प्रियंका गांधी से प्रहलाद गुंजल की मुलाकात… राजस्थान कांग्रेस में क्या हैं इसके सियासी मायने? 40 मिनट की चर्चा ने बढ़ाई सियासी हलचल, कोटा-बूंदी से लेकर प्रभारियों तक के मुद्दों की चर्चा, पढ़िए इनसाइड स्टोरी…

प्रियंका गांधी से प्रहलाद गुंजल की मुलाकात… राजस्थान कांग्रेस में क्या हैं इसके सियासी मायने? 40 मिनट की चर्चा ने बढ़ाई सियासी हलचल, कोटा-बूंदी से लेकर प्रभारियों तक के मुद्दों की चर्चा, पढ़िए इनसाइड स्टोरी…

यतीश व्यास 

कोटा। राजस्थान कांग्रेस की सियासत में इन दिनों भले ही सब कुछ सामान्य नजर आ रहा हो, लेकिन अंदरखाने हलचल कम नहीं है। ऐसे में कोटा-बूंदी से लोकसभा चुनाव लड़ चुके पूर्व विधायक प्रहलाद गुंजल की कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा से हुई लंबी मुलाकात ने नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है।

नई दिल्ली स्थित 10 जनपथ पर करीब 30 से 40 मिनट तक चली इस मुलाकात को महज औपचारिक शिष्टाचार भेंट मानने को राजनीतिक जानकार तैयार नहीं हैं। वजह भी साफ है गुंजल इन दिनों राजस्थान कांग्रेस की राजनीति को करीब से देख रहे हैं और प्रदेश के कई मुद्दों पर खुलकर अपनी राय भी रखते रहे हैं।

आधिकारिक तौर पर भले ही इसे राजस्थान के राजनीतिक, सामाजिक और जनहित के मुद्दों पर चर्चा बताया जा रहा हो, लेकिन सियासी गलियारों में सवाल उठ रहे हैं कि आखिर इतनी लंबी मुलाकात में केवल विकास और जनहित की बातें ही हुईं या फिर राजस्थान कांग्रेस के अंदर चल रही खींचतान और संगठनात्मक हालात पर भी खुलकर चर्चा हुई?

चर्चा तो यहां तक है कि राजस्थान कांग्रेस में प्रभारियों की कार्यशैली और कुछ नेताओं के व्यवहार से जुड़े सवाल भी बातचीत का हिस्सा बने। पार्टी के गलियारों में चर्चित रहे उन घटनाक्रमों का भी जिक्र होने की अटकलें हैं, जिनमें कुछ नेताओं के कथित तौर पर प्रभारियों के साथ असहज व्यवहार और फाइलें फेंकने तक की चर्चाएं भी हैं।

प्रहलाद गुंजल लंबे समय तक भाजपा की राजनीति में सक्रिय रहने के बाद कांग्रेस में आए हैं। ऐसे में उनके पास राजस्थान की सत्ता और विपक्ष दोनों की राजनीति को करीब से देखने का अनुभव है। लोकसभा चुनाव में कोटा-बूंदी से चुनाव लड़ने के बाद उनका प्रदेश के कई नेताओं और कार्यकर्ताओं से सीधा संपर्क भी बढ़ा है। यही वजह है कि प्रियंका गांधी से उनकी मुलाकात को राजस्थान की जमीनी राजनीति का फीडबैक राष्ट्रीय नेतृत्व तक पहुंचाने के रूप में भी देखा जा रहा है।

गुंजल ने मुलाकात के बाद कहा कि राजस्थान की वर्तमान राजनीतिक और सामाजिक परिस्थितियों के साथ युवाओं, किसानों, महिलाओं, कर्मचारियों और आमजन से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई। लेकिन राजनीतिक हलकों में माना जा रहा है कि बातचीत का दायरा केवल कोटा-बूंदी तक सीमित नहीं था।

राजस्थान कांग्रेस के संगठन, नेताओं की भूमिका, जनता की अपेक्षाएं और आने वाले राजनीतिक समीकरण भी चर्चा का हिस्सा रहे होंगे। हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। मुलाकात के बाद राजस्थान कांग्रेस के नेताओं के बीच एक ही सवाल चर्चा का विषय बना हुआ है आखिर प्रहलाद गुंजल की प्रियंका गांधी से अचानक हुई इस मुलाकात के राजनीतिक मायने क्या हैं। 

क्या यह केवल एक वरिष्ठ नेता से आत्मीय मुलाकात थी या फिर राजस्थान कांग्रेस के भविष्य को लेकर राष्ट्रीय नेतृत्व के साथ किसी नए राजनीतिक संवाद की शुरुआत। फिलहाल जवाब भविष्य के गर्भ में है, लेकिन 10 जनपथ पर हुई करीब 40 मिनट की यह मुलाकात राजस्थान की सियासत में चर्चाओं के लिए नया विषय जरूर छोड़ गई है।