कोटा: नसियां जी दादाबाड़ी में 20 अगस्त को रचेगा इतिहास, राजस्थान में पहली बार आचार्य विद्यासागर जी की संघ-परंपरा से मुनि दीक्षा, मुनिश्री योगसागर जी के कर-कमलों से होगा संस्कार

कोटा: नसियां जी दादाबाड़ी में 20 अगस्त को रचेगा इतिहास, राजस्थान में पहली बार आचार्य विद्यासागर जी की संघ-परंपरा से मुनि दीक्षा, मुनिश्री योगसागर जी के कर-कमलों से होगा संस्कार

यतीश व्यास 

कोटा। नसियां जी दादाबाड़ी में 20 अगस्त को होने वाला जैनेश्वरी मुनि दीक्षा समारोह जैन समाज के लिए ऐतिहासिक अवसर बनेगा। मुनि योगसागर जी महाराज के सान्निध्य में राजस्थान में पहली बार आचार्य विद्यासागर जी महाराज की संघ-परंपरा से मुनि दीक्षा होगी। वहीं मुनिश्री योगसागर जी महाराज के कर-कमलों से भी यह पहली मुनि दीक्षा होगी।

चातुर्मास कमेटी संयोजक हुकम जैन काका, नसियां जी मंदिर अध्यक्ष जम्बू जैन सर्राफ एवं महामंत्री महेन्द्र कासलीवाल ने बताया कि मुनिश्री योगसागर जी महाराज इससे पहले रहली में छह ऐलक दीक्षाएं दे चुके हैं। अब पहली मुनि दीक्षा को लेकर देशभर के जैन श्रद्धालुओं में उत्साह है।

6800 श्रद्धालुओं के लिए वाटरप्रूफ मंडप-

समारोह में करीब 6,800 श्रद्धालुओं के बैठने के लिए तीन वाटरप्रूफ मंडप तैयार किए जा रहे हैं। भोजन के लिए भी वाटरप्रूफ पांडाल, महिलाओं के लिए वातानुकूलित हॉल तथा विशिष्ट अतिथियों एवं त्यागी-व्रतियों के लिए अलग भोजन व्यवस्था की गई है। समारोह का सुधाकलश के माध्यम से लाइव प्रसारण भी होगा।

श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए चारपहिया वाहनों और बसों की पार्किंग दादाबाड़ी थाने के पास चिल्ड्रन स्कूल के बाहर तथा राठौर छात्रावास में रहेगी। दोपहिया वाहनों के लिए बॉयज हॉस्टल परिसर में व्यवस्था की गई है। पार्किंग से मंदिर तक निःशुल्क ई-रिक्शा चलेंगे। मंदिर के आसपास चारपहिया वाहन खड़ा करना प्रतिबंधित रहेगा।

आचार्य विद्यासागर जी से प्रेरित हैं संयमसागर जी-

क्षुल्लक संयमसागर जी महाराज आचार्य विद्यासागर जी महाराज के व्यक्तित्व, ज्ञान और आध्यात्मिक जीवन से प्रेरित रहे हैं। उनका पूर्व नाम रत्नाकर जी था। 15 दिसंबर 1987 को कर्नाटक के मोलवाड़ में जन्मे संयमसागर जी ने 25 अप्रैल 2008 को सुखसागर धाम, कलभ्म्बी में मुनि सुखसागर जी महाराज से क्षुल्लक दीक्षा ली। दीक्षा के बाद एक वर्ष मौन साधना की और वे हिन्दी, मराठी एवं कन्नड़ सहित कई भाषाओं के ज्ञाता हैं।