अमेरिका में मौत, पुणे में फर्जी पहचान से बिक गई संपत्ति! मौत के 8 साल बाद ‘जिंदा’ हुआ मालिक! फर्जी पावर ऑफ अटॉर्नी, नकली आधार और मृत व्यक्ति के नाम पर रजिस्ट्री का सनसनीखेज मामला, शिकायत के बाद भी पुलिस ने नहीं की कार्रवाई

अमेरिका में मौत, पुणे में फर्जी पहचान से बिक गई संपत्ति!  मौत के 8 साल बाद ‘जिंदा’ हुआ मालिक! फर्जी पावर ऑफ अटॉर्नी, नकली आधार और मृत व्यक्ति के नाम पर रजिस्ट्री का सनसनीखेज मामला, शिकायत के बाद भी पुलिस ने नहीं की कार्रवाई

क्राइम रिपोर्ट 

पुणे। यदि किसी व्यक्ति की मृत्यु विदेश में हो चुकी हो और उसी व्यक्ति को भारत में जिंदा दिखाकर उसकी संपत्ति बेच दी जाए, तो इसे क्या कहा जाएगा? ऐसा ही एक चौंकाने वाला मामला महाराष्ट्र के पुणे से सामने आया है, जिसमें अमेरिका में वर्ष 2018 में मृत घोषित हो चुके प्रकाश व्यास की संपत्ति को कथित रूप से फर्जी दस्तावेजों के आधार पर बेच दिए जाने का आरोप है।

मामला पुणे के एस.आर. नंबर 51, प्लॉट नंबर 185, नवनाथ श्री अपार्टमेंट के पास, भैरव नगर, पुणे-411015 स्थित संपत्ति से जुड़ा है। बताया गया है कि प्रकाश व्यास अमेरिका के नागरिक थे और उनका पुणे आना-जाना बहुत कम होता था। इसी कारण उन्होंने कई वर्ष पहले अपनी संपत्ति की देखभाल के लिए कृपाशंकर डावर उर्फ ऐलिस पॉल और पेस्टर मैथ्यू नामक व्यक्तियों को जिम्मेदारी सौंपी थी।

परिजनों का आरोप है कि वर्ष 2018 में अमेरिका में प्रकाश व्यास की मृत्यु के बाद दोनों व्यक्तियों ने कथित रूप से फर्जी पावर ऑफ अटॉर्नी तैयार कराई और संबंधित विभागों में संपत्ति अपने नाम दर्ज कराने की प्रक्रिया पूरी कर ली। आरोप तो यह भी है कि मृतक की जगह किसी अन्य व्यक्ति को प्रकाश व्यास बनाकर उसका नकली आधार कार्ड तैयार कराया गया और उसी के जरिए करीब 30 लाख रुपये में संपत्ति का सौदा कुछ लोगों से कर दिया गया।

कोटा में रह रहे वारिसों को मिली सूचना-

बताया गया कि पुणे के कुछ लोगों ने इस पूरे घटनाक्रम की जानकारी प्रकाश व्यास के परिजनों को दी, जो राजस्थान के कोटा में रहते हैं। सूचना मिलने पर प्रकाश व्यास के एकमात्र वैधानिक वारिस पुणे पहुंचे और पूरे मामले की शिकायत पुलिस से की।

पुलिस की भूमिका पर उठे सवाल-

शिकायतकर्ता का आरोप है कि शिकायत दर्ज कराने के बावजूद पुलिस ने न तो दोनों नामजद आरोपियों से प्रभावी पूछताछ की और न ही मामले में कोई ठोस कार्रवाई की। इससे यह आशंका जताई जा रही है कि कहीं आरोपियों को बचाने का प्रयास तो नहीं किया जा रहा।

सूत्रों के हवाले से जानकारी सामने आई है कि कथित रूप से संपत्ति का सौदा होने के बाद पेस्टर मैथ्यू पुलिस कार्रवाई की आशंका के चलते फिलहाल वहां से फरार हो गया है। वहीं, यह भी बताया जा रहा है कि संपत्ति खरीदने वाले, जिन्हें स्थानीय स्तर पर आपराधिक प्रवृत्ति का बताया जा रहा है, उन्होंने मकान पर नया दरवाजा लगवा दिया है तथा परिसर में सीसीटीवी कैमरे भी स्थापित करवा दिए हैं। हालांकि, इन दावों की आधिकारिक पुष्टि पुलिस की ओर से नहीं की गई है।

हत्या के मामले में सजा काटने का भी दावा-

जानकारी के अनुसार, मुख्य आरोपी बताए जा रहे कृपाशंकर डावर उर्फ ऐलिस पॉल के खिलाफ गंभीर आपराधिक पृष्ठभूमि होने का भी दावा किया जा रहा है। आरोप है कि वह पहले हत्या के एक मामले में जेल की सजा भी काट चुका है। हालांकि इस संबंध में पुलिस की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है।

सबसे बड़ा सवाल-

यदि प्रकाश व्यास की मृत्यु वर्ष 2018 में अमेरिका में हो चुकी थी, तो भारत में उन्हें जीवित दिखाने वाले दस्तावेज किसने बनाए? नकली आधार कार्ड किसके सहयोग से जारी हुआ? फर्जी पावर ऑफ अटॉर्नी के आधार पर सरकारी अभिलेखों में नाम परिवर्तन कैसे हो गया? और यदि शिकायत दर्ज हो चुकी है तो अब तक आरोपियों से पूछताछ क्यों नहीं हुई?

अब सभी की निगाहें पुलिस पर टिकी हैं कि क्या इस कथित फर्जीवाड़े के पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश होगा या फिर मृत व्यक्ति की पहचान का दुरुपयोग कर संपत्ति हड़पने का यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा।