‘सरस’ डेयरी का मीठा रस और ‘राहु’ रूपी मक्खियाँ!, ₹100 का काम, ₹1000 का बिल? डेयरी में दलालों के बोलबाले और प्रबंधन की चुप्पी..

‘सरस’ डेयरी का मीठा रस और ‘राहु’ रूपी मक्खियाँ!, ₹100 का काम, ₹1000 का बिल? डेयरी में दलालों के बोलबाले और प्रबंधन की चुप्पी..

यतीश व्यास 

कोटा। कहते हैं जहां गुड़ होगा, वहां मक्खियाँ तो भिनभिनाएंगी ही। कोटा की ‘सरस’ डेयरी का नाम ही इतना रसदार है कि इसकी मिठास देखकर भ्रष्टाचार के आधुनिक “राहु और केतु” (उर्फ दलाल) यहां कतार लगाकर बैठ गए हैं। अब जब रस इतना शुद्ध और सरकारी खजाने जैसा गाढ़ा हो, तो भला ये मक्खियाँ खुद को कैसे रोकें। 

यहाँ का अर्थशास्त्र बड़ा ही गजब और क्रांतिकारी बताया जा रहा है। आरोप है कि जो काम आम दुनिया में ₹100 में आसानी से हो जाता है, उसी काम का ₹1000 का बिल डेयरी के खजाने से पास हो जाता है। सवाल यह है कि आखिर इस अतिरिक्त राशि का लाभ किसे मिल रहा है। 

बताया जा रहा है कि किसानों के पसीने की कमाई पर भ्रष्टाचार की अमरबेल इस तरह फैल चुकी है कि असली हकदार बूंद-बूंद को तरस रहे हैं, जबकि कथित दलाल मलाई मार रहे हैं। आरोप यह भी है कि डेयरी प्रबंधन को पूरे घटनाक्रम की जानकारी होने के बावजूद संबंधित लोगों के खिलाफ कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की जा रही।

चर्चा यह भी है कि इन कथित दलालों को बचाने के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं, चाहे इसके कारण डेयरी को आर्थिक नुकसान ही क्यों न उठाना पड़े। आलोचकों का कहना है कि कार्रवाई के बजाय संरक्षण की नीति अपनाई जा रही है।

सूत्रों के अनुसार, प्रबंध निदेशक (एमडी) पर पहले भी जांच में सहयोग नहीं करने के मामले में विभागीय कार्रवाई की तलवार लटक चुकी है। इसके बावजूद हालात में कोई विशेष बदलाव नहीं दिखाई दे रहा। आरोप है कि यदि यही स्थिति बनी रही तो डेयरी की वित्तीय व्यवस्था पर गंभीर असर पड़ सकता है।

किसान संगठनों और डेयरी से जुड़े लोगों का कहना है कि किसानों की संस्था का लाभ किसानों तक पहुंचे, इसके लिए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। उनका कहना है कि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो नुकसान की भरपाई करना मुश्किल हो सकता है।