कोटा- बिहार से बूंदी मजदूरी करने आया युवक मानसिक बीमारी के चलते बिछड़ा, अपना घर आश्रम ने परिवार तक पहुंचाया

कोटा- बिहार से बूंदी मजदूरी करने आया युवक मानसिक बीमारी के चलते बिछड़ा, अपना घर आश्रम ने परिवार तक पहुंचाया

यतीश व्यास 

कोटा। अपना घर आश्रम ने 10 महीने से परिवार से बिछड़े एक युवक को उसके परिजनों से मिलवा दिया। बिहार के पूर्णिया जिले निवासी नन्द लाल पासवान जब अपने पिता कामदेव पासवान से मिला तो दोनों की आंखों से खुशी के आंसू छलक पड़े। 

जानकारी के अनुसार बिहार के पूर्णिया जिले का रहने वाला नन्द लाल पासवान कृषि कार्य के लिए एक ठेकेदार के साथ राजस्थान के बूंदी जिले आया था। इसी दौरान मानसिक बीमारी के कारण वह अपने साथियों से बिछड़ गया और भटकते-भटकते कोटा पहुंच गया। उसकी मानसिक और शारीरिक स्थिति लगातार बिगड़ती चली गई।

अपना घर आश्रम की टीम ने 30 जुलाई 2025 को मेडिकल कॉलेज से नन्द लाल को लावारिस अवस्था में रेस्क्यू किया। उस समय उसकी हालत बेहद दयनीय थी। वह ठीक से चल भी नहीं पा रहा था और अपने नाम के अलावा कोई जानकारी देने की स्थिति में नहीं था।

आश्रम में चिकित्सकों की देखरेख में उसका उपचार शुरू किया गया। नियमित चिकित्सा और लगातार काउंसलिंग के बाद उसकी स्थिति में सुधार आया। धीरे-धीरे उसने अपने बारे में जानकारी देना शुरू किया। उसने सतवां टोल, पूर्णिया स्टेशन और जलालगढ़ थाना जैसी जानकारी दी। इन्हीं के आधार पर आश्रम की टीम ने बिहार के जलालगढ़ थाना क्षेत्र और स्थानीय जनप्रतिनिधियों से संपर्क साधा।

कई प्रयासों के बाद पता चला कि नन्द लाल पासवान बिहार के पूर्णिया जिले की रहिका पंचायत के बेगमपुर क्षेत्र स्थित संपा गांव का निवासी है। इसके बाद आश्रम ने उसके परिजनों से संपर्क किया और उन्हें नन्द लाल के सुरक्षित होने की सूचना दी।

नन्द लाल के पिता कामदेव पासवान ने बताया कि आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण वह तत्काल कोटा नहीं आ सके। जैसे ही व्यवस्था बनी, वह परिजनों के साथ कोटा पहुंचे। अपने बेटे को 10 महीने बाद स्वस्थ और सुरक्षित देखकर उनकी आंखें भर आईं। उन्होंने अपना घर आश्रम और वहां के सेवा साथियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उन्हें अपने बेटे के मिलने की उम्मीद लगभग खत्म हो चुकी थी।