JJM घोटाले में बड़ा एक्शन: पूर्व मंत्री महेश जोशी गिरफ्तार, 960 करोड़ के फर्जी सर्टिफिकेट टेंडर घोटाले में ACB की तड़के दबिश, कई अफसरों पर भी लटकी गिरफ्तारी की तलवार

JJM घोटाले में बड़ा एक्शन: पूर्व मंत्री महेश जोशी गिरफ्तार, 960 करोड़ के फर्जी सर्टिफिकेट टेंडर घोटाले में ACB की तड़के दबिश, कई अफसरों पर भी लटकी गिरफ्तारी की तलवार

यतीश व्यास 

कोटा/जयपुर। राजस्थान की राजनीति में गुरुवार सुबह उस समय हलचल मच गई, जब भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने जल जीवन मिशन (JJM) घोटाले में पूर्व पीएचईडी मंत्री महेश जोशी को उनके जयपुर स्थित आवास से गिरफ्तार कर लिया। करीब 960 करोड़ रुपए के कथित फर्जी टेंडर घोटाले में यह अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई मानी जा रही है।

एसीबी के डीआईजी डॉ. रामेश्वर सिंह के नेतृत्व में गठित एसआईटी की टीम सुबह करीब 4 बजे जयपुर की सैन कॉलोनी स्थित आवास पर पहुंची और कार्रवाई करते हुए जोशी को हिरासत में ले लिया। बताया जा रहा है कि लंबी पूछताछ और दस्तावेजों की जांच के बाद एसीबी ने यह कदम उठाया।

फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र से हासिल किए करोड़ों के टेंडर-

जांच में सामने आया है कि केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी जल जीवन मिशन योजना के तहत टेंडर हासिल करने के लिए फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र लगाए गए। आरोप है कि श्री गणपति ट्यूबवेल कंपनी और श्री श्याम ट्यूबवेल कंपनी ने इरकॉन इंटरनेशनल के नाम से फर्जी दस्तावेज पेश कर विभाग से बड़े ठेके हासिल किए।

एसीबी के अनुसार, श्री गणपति ट्यूबवेल को करीब 859 करोड़ रुपए और श्री श्याम ट्यूबवेल को करीब 120 करोड़ रुपए के टेंडर जारी किए गए। जांच एजेंसी का दावा है कि इस पूरे खेल में तत्कालीन मंत्री महेश जोशी की भूमिका भी सामने आई है। आरोप है कि पद का दुरुपयोग कर संबंधित कंपनियों को फायदा पहुंचाया गया।

अब कई अफसर और आरोपी रडार पर-

महेश जोशी की गिरफ्तारी के बाद एसीबी की जांच और तेज हो गई है। विभाग के कई वरिष्ठ अफसरों सहित कुछ फरार आरोपियों पर भी शिकंजा कसने की तैयारी चल रही है। सूत्रों के मुताबिक, एसीबी जल्द ही महेश जोशी और पूर्व आईएएस अधिकारी सुबोध अग्रवाल को आमने-सामने बैठाकर पूछताछ कर सकती है, ताकि पूरे नेटवर्क और लेन-देन की परतें खोली जा सकें।