किन्नरों की ‘बधाई वसूली’ पर हाईकोर्ट सख्त कहा- कोई कानूनी अधिकार नहीं, इलाहाबाद हाईकोर्ट का फैसला, परंपरा के नाम पर वसूली को नहीं दी मान्यता, कोटा सहित राजस्थान में भी कानून बनाने की उठी मांग

किन्नरों की ‘बधाई वसूली’ पर हाईकोर्ट सख्त कहा- कोई कानूनी अधिकार नहीं, इलाहाबाद हाईकोर्ट का फैसला, परंपरा के नाम पर वसूली को नहीं दी मान्यता, कोटा सहित राजस्थान में भी कानून बनाने की उठी मांग

यतीश व्यास 

कोटा, 30 अप्रेल। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने किन्नर समुदाय द्वारा पारंपरिक ‘बधाई’ या नजराना लेने के अधिकार को लेकर अहम फैसला देते हुए स्पष्ट किया है कि ऐसी वसूली का कोई कानूनी आधार नहीं है। कोर्ट ने कहा कि बिना कानून के किसी से धन लेना वैध नहीं माना जा सकता।

रेखा देवी बनाम उत्तर प्रदेश राज्य मामले में 15 अप्रैल को दिए फैसले में न्यायमूर्ति आलोक माथुर और न्यायमूर्ति अमिताभ कुमार राय की खंडपीठ ने याचिका खारिज कर दी। याचिकाकर्ता ने अपने ‘क्षेत्राधिकार’ में अन्य किन्नरों के हस्तक्षेप पर सुरक्षा की मांग की थी और इसे परंपरागत अधिकार बताया था।

कोर्ट ने साफ कहा कि कानून के तहत ही कर, शुल्क या उपकर वसूले जा सकते हैं। किसी भी परंपरा के नाम पर धन वसूली को वैध नहीं ठहराया जा सकता। साथ ही चेतावनी दी कि ऐसी छूट देने से अवैध वसूली करने वाले गिरोह सक्रिय हो सकते हैं, जो दंडनीय अपराध है।

खंडपीठ ने यह भी कहा कि भारतीय संविधान का अनुच्छेद 226 के तहत अदालत बिना कानूनी आधार के ऐसे अधिकारों को मान्यता नहीं दे सकती। याचिकाकर्ता द्वारा अनुच्छेद 14, 19 और 21 के तहत संरक्षण की मांग भी अस्वीकार कर दी गई।

कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकार संरक्षण) अधिनियम, 2019 में भी ऐसे किसी अधिकार का प्रावधान नहीं है।

इस फैसले के बाद कोटा सहित राजस्थान में भी ‘बधाई वसूली’ पर स्पष्ट कानून बनाने की मांग उठने लगी है, ताकि अवैध वसूली पर रोक लगाई जा सके।