कोटा: एक ओर केडीए कंगाल, लोन से चल रहा काम, दूसरी ओर विकास के नाम पर धन की बर्बादी

कोटा: एक ओर केडीए कंगाल, लोन से चल रहा काम, दूसरी ओर विकास के नाम पर धन की बर्बादी

यतीश व्यास 

कोटा। कांग्रेस सरकार में एक व्यक्ति की सनक से शहर का सत्यानाश हो गया। यूआईटी, जो अब कोटा विकास प्राधिकरण बन गया है, कंगाल हो चुका है। प्राधिकरण को लोन के सहारे चलाया जा रहा है, जबकि उस पर करीब 800 करोड़ रुपए का कर्ज बताया जा रहा है।

इसके बावजूद शहर में लगातार धन की बर्बादी की जा रही है। महावीर नगर थाने से हाड़ी रानी सर्किल तक पहले से बने हुए अच्छे डिवाइडरों को तोड़कर नए निर्माण का काम किया जा रहा है। दादाबाड़ी और शास्त्री नगर सहित कई स्थानों पर पहले से विकसित और अच्छी स्थिति में बने पार्कों को तोड़कर फिर से निर्माण कराया जा रहा है। इसी तरह अच्छी सड़कों को भी तोड़कर दोबारा बनाया जा रहा है, जबकि इसकी कोई आवश्यकता नहीं है।

ज्योति मंदिर दादाबाड़ी के सामने नाले में करोड़ों रुपए खर्च किए जा चुके हैं। कृष्ण मुरारी गौशाला दादाबाड़ी के सामने नाले पर भी भारी धनराशि खर्च की जा चुकी है। शहर के कई हिस्सों में गैर जरूरी विकास के नाम पर पहले से बने अच्छे निर्माणों को तोड़कर दोबारा काम किया जा रहा है।

स्थिति ऐसी बन गई है कि मानो ठेकेदारों को काम देने के लिए ही इस प्रकार के कार्य करवाए जा रहे हों। जबकि जरूरत हो तो नए निर्माण कार्य किए जा सकते हैं। विकास के नाम पर भ्रष्टाचार की पराकाष्ठा देखने को मिल रही है। जनता के धन की लूट हो रही है और आम नागरिक मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रहा है।

पूर्व में शहर के पार्कों और अन्य स्थानों पर सीमेंट की रेलिंग लगाई गई थी, जिसे बाद में लोहे की रेलिंग से बदला गया। लोहे की रेलिंग चोरी होने लगी तो फिर से सीमेंट की रेलिंग लगाई गई। अब एक बार फिर कई जगह लोहे की रेलिंग लगाई जा रही है।

यह स्थिति बताती है कि देश में भ्रष्टाचार किस हद तक व्याप्त है। यदि भारत में भ्रष्टाचार नहीं होता तो दुनिया के कई देश पीछे होते। हम बातों में भले ही विश्वगुरु बनने का दावा करते हों, लेकिन भ्रष्टाचार में शीर्ष पर नजर आते हैं। देश में अनेक सत्ता केंद्र बन चुके हैं, जिससे व्यवस्था बिगड़ रही है। जनता की सेवा के नाम पर नेता ही जनता के धन का दुरुपयोग कर रहे हैं।