कोटा मेडिकल कॉलेज में मौतों का सिलसिला बरकरार, 24 घंटे में दो प्रसूताओं की गई जान

कोटा मेडिकल कॉलेज में मौतों का सिलसिला बरकरार, 24 घंटे में दो प्रसूताओं की गई जान

यतीश व्यास

कोटा। संभाग के सबसे बड़े सरकारी चिकित्सा संस्थानों में शामिल न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल में प्रसव के बाद 24 घंटे में दो महिलाओं की मौत के मामलों ने चिकित्सा व्यवस्थाओं को लेकर गंभीर चिंता खड़ी कर दी है। एक के बाद एक सामने आ रहे इन मामलों से परिजनों की पीड़ा के साथ ही अस्पताल में प्रसूताओं की सुरक्षा और आपातकालीन उपचार व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं।

आज बारां निवासी रोशन बैरवा जिनकी सिजेरियन डिलीवरी के बाद अत्यधिक रक्तस्राव होने से मौत हो गई। इससे पहले शुक्रवार को प्रसव के बाद किडनी फेल होने के मामले में 40 वर्षीय रेशमा की मौत की खबर सामने आई थी। महज 24 घंटे के भीतर दो प्रसूताओं की मौत ने स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर चिंता बढ़ा दी है।

सिजेरियन के बाद नहीं थमा रक्तस्राव, 11 घंटे तक जूझती रही रोशन-

रोशन बैरवा को शुक्रवार रात करीब 8 बजे परिजन न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल लेकर पहुंचे थे। अस्पताल अधीक्षक डॉ. आशुतोष शर्मा के अनुसार रोशन बारां की निवासी थी और उसका बारां तथा कोटा के निजी अस्पतालों में भी उपचार चल रहा था। महिला की गर्भावस्था को हाई रिस्क श्रेणी में रखा गया था। उसे एनीमिया था और वजन भी महज 39 से 40 किलोग्राम के बीच था। यह उसकी तीसरी गर्भावस्था थी। शुक्रवार रात करीब 12 बजे सिजेरियन ऑपरेशन के जरिए रोशन ने बच्चे को जन्म दिया। इसके बाद उसे अत्यधिक रक्तस्राव होने लगा। रक्तस्राव रोकने के लिए एक यूनिट रक्त चढ़ाया गया, लेकिन स्थिति में सुधार नहीं हुआ। हालत बिगड़ने पर महिला को दोबारा ऑपरेशन थिएटर में ले जाया गया, फिर भी रक्तस्राव नियंत्रित नहीं हो सका। शनिवार सुबह करीब 11:30 बजे रोशन ने दम तोड़ दिया।

मृतका के पति महेंद्र के अनुसार, शनिवार सुबह करीब 7 बजे रोशन की सांस फूलने लगी और उसकी तबीयत तेजी से बिगड़ने लगी। इसके बाद उसे आईसीयू में शिफ्ट किया गया। महेंद्र ने बताया कि उस दौरान रोशन का पेट भी फूल रहा था। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि चिकित्सकों की टीम ने महिला को बचाने के भरसक प्रयास किए, लेकिन अधिक रक्तस्राव के कारण उसकी जान नहीं बचाई जा सकी।
परिजनों ने कार्रवाई नहीं करने के संबंध में लिखित सहमति दी और पोस्टमार्टम कराने से इनकार कर दिया। इसके बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया।

गौरतलब है कि न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल में प्रसूताओं की मौत का यह पहला मामला नहीं है। मई 2026 में भी सिजेरियन प्रसव के बाद महिलाओं की तबीयत बिगड़ने और किडनी संबंधी गंभीर जटिलताओं का मामला सामने आया था। उस घटनाक्रम में पांच महिलाओं की मौत हुई थी, जबकि कई अन्य महिलाओं की किडनी प्रभावित होने की जानकारी सामने आई थी। मामले के बाद चिकित्सकों और अस्पताल की व्यवस्थाओं को लेकर सवाल उठे थे तथा जांच भी कराई गई थी। अक्टूबर की शुरुआत में उन मामलों से जुड़े तीन वरिष्ठ चिकित्सकों को निलंबन के बाद बहाल किए जाने की खबर भी सामने आई थी। वहीं, मृत महिलाओं के परिजनों ने जांच रिपोर्ट और कार्रवाई संबंधी दस्तावेज सार्वजनिक करने की मांग उठाई थी। 

अब रोशन बैरवा और रेशमा की मौत के नए मामलों ने एक बार फिर अस्पताल की प्रसूति सेवाओं को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि, प्रत्येक मामले में मौत के वास्तविक कारण और किसी संभावित चिकित्सकीय लापरवाही की पुष्टि जांच के आधार पर ही हो सकती है।

सरकारी अस्पतालों में गरीब और मध्यमवर्गीय परिवार बेहतर एवं सुलभ उपचार की उम्मीद लेकर पहुंचते हैं। प्रसव जैसी संवेदनशील स्थिति में महिला की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। यदि किसी प्रसूता की हालत गंभीर है, तो समय पर विशेषज्ञ उपचार, रक्त की उपलब्धता, आपातकालीन व्यवस्था और लगातार निगरानी की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है।
न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल में पहले भी प्रसूताओं की मौतों के मामले सामने आने और अब दोबारा ऐसी घटनाएं होने के बाद जरूरी है कि प्रशासन प्रत्येक मामले की निष्पक्ष समीक्षा करे। यह भी स्पष्ट किया जाना चाहिए कि उपचार के दौरान क्या परिस्थितियां बनीं, आपातकालीन कदम कितनी तेजी से उठाए गए और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या सुधार किए जा रहे हैं।