कोटा: सरकारी विद्यालय में बाहरी दखल के विरोध में शिक्षक महासंघ मुखर, लेकिन प्रेस वार्ता में पत्रकारों के सवालों पर नहीं दे पाए स्पष्ट जवाब

कोटा: सरकारी विद्यालय में बाहरी दखल के विरोध में शिक्षक महासंघ मुखर, लेकिन प्रेस वार्ता में पत्रकारों के सवालों पर नहीं दे पाए स्पष्ट जवाब

यतीश व्यास 

कोटा। राजकीय विद्यालयों में बाहरी हस्तक्षेप और विद्यालयी व्यवस्था में राजनीतिक दखल के विरोध को लेकर अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ, राजस्थान (विद्यालय शिक्षा), कोटा संभाग ने अपना रुख स्पष्ट किया है। महासंघ ने कहा कि विद्यालय शिक्षा के मंदिर हैं और इन्हें राजनीतिक विवादों का केंद्र नहीं बनने दिया जाना चाहिए। हालांकि, प्रेस वार्ता के दौरान पत्रकारों की ओर से हालिया घटनाक्रम को लेकर पूछे गए सवालों पर संगठन के प्रदेश उपाध्यक्ष पूरणमल नागर कई सवालों का स्पष्ट जवाब नहीं दे पाए।

प्रदेश उपाध्यक्ष पूरणमल नागर ने बताया कि हाल ही में सीजेपी के प्रवक्ता आशुतोष रांका सहित कुछ बाहरी लोगों द्वारा राजकीय विद्यालय में निरीक्षण का प्रयास किया गया था। इस दौरान ग्रामीणों ने इसका विरोध किया और विवाद बढ़ने पर गाली-गलौज तथा मारपीट की घटना सामने आई। महासंघ ने स्पष्ट किया कि वह किसी भी प्रकार की हिंसा का समर्थन नहीं करता, लेकिन सवाल यह है कि विद्यालय से जुड़े किसी भी विवाद को राजनीतिक रंग देने की आवश्यकता क्यों पड़ रही है। विद्यालय की व्यवस्था या सुविधाओं को लेकर किसी को आपत्ति है तो शिक्षा विभाग और प्रशासन के निर्धारित माध्यमों से शिकायत की जा सकती है।

बता दें कि सीजेपी की टीम जयपुर जिले के बगरू क्षेत्र के रामपुरा कंवरपुरा गांव स्थित राजकीय प्राथमिक विद्यालय में पहुंची थी। यह स्कूल जर्जर हालत के कारण चर्चा में है और रिपोर्टों के अनुसार कक्षाएं फिलहाल टीनशेड/गोशाला जैसे परिसर में संचालित हो रही थीं। 21 अगस्त को सीजेपी के प्रवक्ता आशुतोष रांका अपनी टीम के साथ स्कूल की स्थिति का निरीक्षण करने पहुंचे थे। वहां ग्रामीणों ने टीम का विरोध किया और विवाद बढ़ने पर धक्का-मुक्की, मारपीट तथा पथराव की स्थिति बनी। 

प्रेस वार्ता में पत्रकारों ने शिक्षक संगठन के पदाधिकारियों से पूछा कि निरीक्षण करने पहुंचे लोगों की भूमिका को लेकर संगठन की आपत्ति क्या है, जैसे कई सवालों पर प्रदेश उपाध्यक्ष पूरणमल नागर स्पष्ट और सीधे जवाब नहीं दे सके।

इससे प्रेस वार्ता को लेकर यह सवाल भी उठने लगा कि क्या यह हालिया विवाद के बाद केवल शिक्षक संगठन का पक्ष सामने रखने के उद्देश्य से आयोजित की गई थी। पत्रकारों के लगातार सवालों के बावजूद कई बिंदुओं पर स्पष्टता नहीं आने से प्रेस वार्ता की मंशा को लेकर भी चर्चा रही। हालांकि महासंघ ने इसे प्रदेश नेतृत्व के आह्वान पर आयोजित नियमित प्रेस वार्ता बताया।

उपाध्यक्ष (प्राथमिक शिक्षा) नवलकिशोर शर्मा ने कहा कि राजस्थान सरकार और शिक्षा विभाग विद्यालयी शिक्षा व्यवस्था में चरणबद्ध सुधार कर रहे हैं। संस्था प्रधान की अनुमति और निर्धारित प्रक्रिया के तहत विद्यालय में प्रवेश किया जा सकता है, लेकिन विद्यालयी व्यवस्था को राजनीतिक विवाद का विषय बनाना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि शिक्षक विद्यार्थियों के भविष्य निर्माण के लिए हैं और विद्यालयों में शांतिपूर्ण एवं शैक्षणिक वातावरण बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है।

महासंघ ने कहा कि प्रदेश के करीब 10 हजार विद्यालयों में संगठन से जुड़े शिक्षक शैक्षणिक एवं भौतिक संसाधनों के सुधार के लिए सक्रिय रूप से कार्य कर रहे हैं। संगठन का मुख्य उद्देश्य विद्यालयों की गरिमा बनाए रखना और विद्यार्थियों के लिए बेहतर शैक्षणिक वातावरण सुनिश्चित करना है।

प्रेस वार्ता में कोटा जिलाध्यक्ष रासबिहारी यादव, जिलामंत्री सत्येंद्र चौहान, कोषाध्यक्ष अशोक नागर सहित संगठन के अन्य पदाधिकारी उपस्थित रहे।