बारां: मान्यता पांचवीं तक..एडमिशन बारहवीं तक! निजी स्कूलों के खेल में छात्रों का भविष्य दांव पर

बारां: मान्यता पांचवीं तक..एडमिशन बारहवीं तक!  निजी स्कूलों के खेल में छात्रों का भविष्य दांव पर

विष्णु भारद्वाज 

बारां। नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत के साथ ही जिले के निजी विद्यालयों की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। शहर सहित जिलेभर में ऐसे कई निजी विद्यालयों के संचालन की चर्चा है, जिनके पास मान्यता केवल प्राथमिक अथवा उच्च प्राथमिक स्तर (पांचवीं या आठवीं) तक की है, लेकिन वे स्वयं को सीनियर सेकेंडरी विद्यालय बताकर विद्यार्थियों के प्रवेश ले रहे हैं। इससे सैकड़ों विद्यार्थियों के भविष्य पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

जानकारी के अनुसार, कई विद्यालय आकर्षक विज्ञापनों, आधुनिक सुविधाओं, अंग्रेजी माध्यम और उत्कृष्ट परीक्षा परिणामों का दावा कर अभिभावकों को लुभाते हैं। प्रवेश के समय स्मार्ट क्लास, प्रशिक्षित शिक्षकों, खेल सुविधाओं और बेहतर शैक्षणिक वातावरण का भरोसा दिया जाता है, लेकिन बाद में अधिकांश सुविधाएं अपेक्षाओं पर खरी नहीं उतरतीं।

सूत्रों का दावा है कि अकेले बारां शहर में ही करीब 50 ऐसे विद्यालय हैं, जहां मान्यता और वास्तविक संचालन में बड़ा अंतर देखने को मिल रहा है। यदि इन आरोपों की निष्पक्ष जांच कराई जाए तो कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आ सकते हैं।

शिक्षकों के शोषण के भी आरोप-

निजी विद्यालयों पर केवल मान्यता संबंधी अनियमितताओं ही नहीं, बल्कि शिक्षकों के शोषण के भी आरोप लग रहे हैं। बताया जा रहा है कि कई विद्यालयों में बेरोजगारी का लाभ उठाकर शिक्षकों से सरकारी मापदंड के अनुरूप अधिक वेतन के हस्ताक्षर कराए जाते हैं, जबकि वास्तविक भुगतान उससे काफी कम किया जाता है। विरोध करने पर नौकरी छोड़ने की बात कहकर दबाव बनाने की शिकायतें भी सामने आ रही हैं।

अभिभावकों की चिंता बढ़ी-

अभिभावकों का कहना है कि वे बच्चों के बेहतर भविष्य की उम्मीद में निजी विद्यालयों में मोटी फीस जमा करते हैं, लेकिन यदि विद्यालय के पास संबंधित कक्षाओं की वैध मान्यता ही नहीं है तो सबसे बड़ा नुकसान विद्यार्थियों को उठाना पड़ सकता है। ऐसे में उनके भविष्य को लेकर चिंता स्वाभाविक है।

जांच व्यवस्था पर भी उठे सवाल-

मामले को लेकर शिक्षा विभाग की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं। यदि किसी विद्यालय के पास उच्च कक्षाओं की मान्यता नहीं है तो उन कक्षाओं का संचालन लंबे समय से कैसे हो रहा है और संबंधित अधिकारियों की ओर से अब तक प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं की गई। 

अब नजर शिक्षा विभाग पर है कि वह इन आरोपों की गंभीरता को देखते हुए जिले के निजी विद्यालयों की मान्यता, स्टाफ, आधारभूत सुविधाओं और फीस व्यवस्था की व्यापक जांच कराता है या नहीं। यदि निष्पक्ष जांच होती है तो शिक्षा व्यवस्था से जुड़े कई अहम तथ्य सामने आ सकते हैं।