कोटा- अस्पताल की भीड़ में परिजनों से बिछड़ी वृद्धा, डेढ़ माह बाद बेटे से मिलाया अपना घर आश्रम ने

कोटा- अस्पताल की भीड़ में परिजनों से बिछड़ी वृद्धा, डेढ़ माह बाद बेटे से मिलाया अपना घर आश्रम ने

यतीश व्यास 

कोटा, 2 मई। अपना घर आश्रम ने डेढ़ माह से बिछड़ी 75 वर्षीय वृद्धा को आखिरकर उनके परिवार से मिलवा दिया। ग्वालियर निवासी आनंदी देवी के अपने बेटे प्रताप जाटव से मिलन का दृश्य इतना भावुक था कि वहां मौजूद लोगों की आंखें भी नम हो गईं।

जानकारी के अनुसार, मध्यप्रदेश के ग्वालियर जिले के बरैनी गांव निवासी आनंदी देवी इलाज के लिए ग्वालियर के सरकारी अस्पताल गई थीं, जहां भीड़भाड़ के दौरान वह परिजनों से बिछड़ गईं। परिवार ने उनकी तलाश में थानों, अस्पतालों और रिश्तेदारों के यहां लगातार प्रयास किए, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला।

इसी दौरान समाजसेवी प्रतीक्षा पारीक ने कोटा के जे.के. लोन अस्पताल के बाहर एक वृद्ध महिला को लावारिस हालत में भटकते देखा। सूचना मिलने पर अपना घर आश्रम की टीम मौके पर पहुंची और वृद्धा को आश्रम में आश्रय देकर उपचार व देखभाल शुरू की। मानसिक रूप से अस्वस्थ होने के कारण वह अपने बारे में अधिक जानकारी नहीं दे पा रही थीं।

आश्रम में नियमित काउंसलिंग और देखभाल के दौरान वृद्धा ने अपना नाम आनंदी देवी तथा ग्वालियर जिले के बरैनी गांव की निवासी होने की जानकारी दी। इसके बाद आश्रम प्रशासन ने डबरा थाने से संपर्क किया। पुलिस की मदद से वृद्धा के बेटे प्रताप जाटव तक सूचना पहुंचाई गई। फोटो देखते ही प्रताप ने अपनी मां को पहचान लिया और तुरंत अपने भतीजे रामदास के साथ कोटा के लिए रवाना हो गया।

अपना घर आश्रम पहुंचते ही प्रताप ने जैसे ही अपनी मां को देखा, वह उनसे लिपटकर फूट-फूट कर रो पड़ा। बेटे ने बताया कि मां के लापता होने के बाद पूरा परिवार गहरे सदमे में था और लगातार उनकी तलाश कर रहा था। उन्होंने कहा कि अपना घर आश्रम का फोन उनके लिए किसी चमत्कार से कम नहीं था। आश्रम प्रबंधन के अनुसार, जब आनंदी देवी को आश्रम लाया गया था तब उनकी स्थिति काफी कमजोर थी। समय पर देखभाल और उपचार मिलने से उनकी हालत में सुधार हुआ और परिवार तक पहुंचने का रास्ता भी खुल सका।

इस सफल पुनर्मिलन में डबरा पुलिस और अपना घर आश्रम की टीम की सक्रिय भूमिका रही।