यह समय पाठकों से बेईमानी का नहीं- कोटा में ‘मेरे गीत और नवगीत’ का लोकार्पण

यह समय पाठकों से बेईमानी का नहीं- कोटा में ‘मेरे गीत और नवगीत’ का लोकार्पण

यतीश व्यास 


कोटा, 22 मार्च। देश के प्रख्यात व्यंग्यकार व समालोचक सुभाष चंदर ने कहा कि वर्तमान समय का पाठक बेहद सजग है, इसलिए साहित्य में ईमानदारी जरूरी है। वे रंगनाथन सभागार, मंडल पुस्तकालय में गीतकार जितेन्द्र निर्मोही की कृति मेरे गीत और नवगीत के लोकार्पण समारोह में बोल रहे थे।

कार्यक्रम की अध्यक्षता रामकिशोर उपाध्याय ने की। उन्होंने निर्मोही को समकालीन गीत परंपरा का महत्वपूर्ण रचनाकार बताते हुए कहा कि वे अपनी रचनाओं में देशज शब्दों और लोक संवेदना का प्रभावी प्रयोग करते हैं। समारोह में सरस्वती वंदना डॉ शशि जैन ने प्रस्तुत की, जबकि वंदना आचार्य व आनंदिता शर्मा सहित अन्य कलाकारों ने गीतों की प्रस्तुतियां दीं। 

बीज वक्ता विजय जोशी ने कहा कि गीत की परंपरा प्राचीन काल से चली आ रही है और इसकी ताकत उसकी लयात्मकता में है। विशिष्ट अतिथि डॉ कपिल गौतम ने निर्मोही के गीतों को सामाजिक सरोकारों से जुड़ा बताया। मुख्य वक्ता डॉ विवेक मिश्र ने कहा कि यह कृति लेखक की दीर्घ साधना का परिणाम है, जिसमें लोक, शास्त्र और समकालीन संवेदनाओं का सुंदर समन्वय है।

कार्यक्रम में विभिन्न साहित्यिक संस्थाओं ने अतिथियों का सम्मान किया। संचालन नहुष व्यास ने किया और आभार हर्ष मित्र शर्मा ने व्यक्त किया।