ग्रामीणों की मांगों को लेकर सड़क पर उतरे किसान-पशुपालक, प्रशासन को 15 दिन का अल्टीमेटम, प्रहलाद गुंजल के नेतृत्व में प्रदर्शन, संभागीय आयुक्त को सौंपा ज्ञापन; मांगें नहीं मानी गईं तो कोटा जाम की चेतावनी

ग्रामीणों की मांगों को लेकर सड़क पर उतरे किसान-पशुपालक, प्रशासन को 15 दिन का अल्टीमेटम, प्रहलाद गुंजल के नेतृत्व में प्रदर्शन, संभागीय आयुक्त को सौंपा ज्ञापन; मांगें नहीं मानी गईं तो कोटा जाम की चेतावनी

यतीश व्यास 

कोटा। वन विभाग, कोटा विकास प्राधिकरण (केडीए) एवं प्रशासनिक कार्रवाई के विरोध में गुरुवार को कांग्रेस नेता प्रहलाद गुंजल के नेतृत्व में हजारों की संख्या में किसान, पशुपालक और ग्रामीण सीएडी सर्किल पर एकत्रित हुए। यहां सभा और धरना आयोजित करने के बाद प्रदर्शनकारी संभागीय आयुक्त कार्यालय पहुंचे तथा अपनी विभिन्न मांगों को लेकर ज्ञापन सौंपा।

संभागीय आयुक्त कार्यालय पहुंचने पर प्रतिनिधिमंडल अधिकारियों से वार्ता के लिए अंदर गया, जबकि बड़ी संख्या में कार्यकर्ता कार्यालय परिसर के बाहर मौजूद रहे। इस दौरान कुछ कार्यकर्ताओं ने बैरिकेड्स पार कर आगे बढ़ने का प्रयास किया, जिन्हें पुलिस ने रोक दिया। मौके पर पुलिस और कार्यकर्ताओं के बीच हल्की धक्का-मुक्की और खींचतान की स्थिति भी बनी रही।

प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी की तथा कुछ कार्यालय परिसर के बाहर लगे बोर्डों पर चढ़ गए, जिन्हें पुलिसकर्मियों ने नीचे उतारा। वहीं, प्रदर्शन स्थल पर डीजे के माध्यम से माहौल भी गर्म रहा। 

सभा को संबोधित करते हुए प्रहलाद गुंजल ने आरोप लगाया कि पिछले दो वर्षों से कोटा और बूंदी क्षेत्र के किसानों एवं पशुपालकों को विभिन्न विभागों की कार्रवाई का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि वन क्षेत्रों में वर्षों से बसे ग्रामीणों को बेदखल करने की कोशिशें की जा रही हैं, जिससे लोगों में असंतोष व्याप्त है। गुंजल ने कहा कि कोटा विकास प्राधिकरण का क्षेत्र बढ़ने के बाद बड़ी संख्या में गांव प्रभावित हुए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि दशकों से निवास कर रहे लोगों के मकानों और भूमि पर कार्रवाई की जा रही है, जबकि वे नियमानुसार आवंटन के पात्र हैं। उन्होंने दावा किया कि इससे लगभग 200 गांवों के लोग प्रभावित हो रहे हैं।

प्रदर्शनकारियों ने वन अधिकार अधिनियम-2006 का प्रभावी पालन, वर्षों पुराने कब्जों का नियमन, आदिवासी भील समुदाय को संरक्षण तथा रानपुर थाना प्रकरण की निष्पक्ष जांच सहित कई मांगें प्रशासन के समक्ष रखीं।

ज्ञापन सौंपने के बाद प्रहलाद गुंजल ने कहा कि प्रशासन को मांगों पर कार्रवाई के लिए 15 दिन का समय दिया गया है। यदि इस अवधि में कोई ठोस और सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो व्यापक जनआंदोलन किया जाएगा तथा आवश्यक हुआ तो कोटा बंद और कोटा जाम जैसे कदम भी उठाए जाएंगे।