मां का गांव और बचपन का लोकार्पण: स्मृतियां ही साहित्य का सच्चा घर- रोशन भारती

मां का गांव और बचपन का लोकार्पण: स्मृतियां ही साहित्य का सच्चा घर- रोशन भारती

यतीश व्यास 


कोटा, 22 मार्च। संस्मरणकार श्वेता शर्मा की कृति मां का गांव और बचपन का लोकार्पण समारोह बुधवार को आयोजित हुआ। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि अंतरराष्ट्रीय गज़ल गायक व शिक्षाविद् प्रो. रोशन भारती रहे, जबकि अध्यक्षता योगेन्द्र शर्मा ने की। रोशन भारती ने कहा कि स्मृतियां ही साहित्य का सच्चा घर हैं। मां और गांव की यादों से उपजी ऐसी कृतियां जीवन, संस्कृति और संवेदनाओं का सजीव चित्र प्रस्तुत करती हैं। उन्होंने जितेन्द्र निर्मोही को इस अंचल के साहित्यकारों के मार्गदर्शक के रूप में सराहा।

योगेन्द्र शर्मा ने कहा कि यह कृति पाठकों को ग्राम्य जीवन के सहज और जीवंत परिवेश खेत-खलिहान, लोकरीति और पारिवारिक संबंधों से जोड़ती है।

मुख्य वक्ता विजय जोशी ने कहा कि संस्मरण साहित्य में विभिन्न विधाओं का समावेश होता है और यह कृति मां की स्मृतियों के माध्यम से विशेष महत्व प्राप्त करती है। डॉ विवेक मिश्र ने इसे हाड़ौती अंचल के अतीत और समाज से जोड़ने वाली कृति बताया। विशिष्ट अतिथि डॉ प्रभात सिंघल ने कहा कि पुस्तक ग्राम्य जीवन, सामाजिक संबंधों और परिवेश का सजीव चित्रण करती है। सुमन शर्मा ने इसे भविष्य में ग्रामीण जीवन के दस्तावेज के रूप में महत्वपूर्ण बताया।

कार्यक्रम की शुरुआत सरस्वती वंदना से हुई, जिसकी प्रस्तुति आनंदिता ने दी। स्वागत उद्बोधन जोधराज परिहार ‘मधुकर’ ने दिया तथा संचालन नहुष व्यास ने किया। समारोह में क्षेत्र के अनेक साहित्यकारों व साहित्य प्रेमियों की उपस्थिति रही।